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Agricultural Problem : धान के खेतों में ‘जुराई’ का कहर! पत्तियों से जड़ों तक कीट का हमला, पीली पड़ रही फसल

लखनऊ के निगोहां-भगवानपुर समेत कई गांवों में तेजी से फैल रहा प्रकोप, दवा के छिड़काव के बाद भी राहत नहीं, किसान बोले-फसल बचाना मुश्किल हुआ तो लागत निकालना भी होगा भारी

एमएम खान

मोहनलालगंज (लखनऊ), 16 सितंबर 2026:

धान की फसल के लिए सितंबर का महीना बेहद अहम माना जाता है लेकिन यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके के किसानों की चिंता इन दिनों एक कीट ने बढ़ा दी है। निगोहां, भगवानपुर समेत आसपास के गांवों में धान की फसल में ‘जुराई’ कीट के प्रकोप की शिकायत सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि कीट जिस खेत में पहुंच रहा है, वहां फसल तेजी से प्रभावित हो रही है।

धान की फसल इस समय गाले की अवस्था में है और कीट पत्तियों के साथ निकल रहे नए अंकुरों को नुकसान पहुंचा रहा है। भगवानपुर के किसान किशनलाल के मुताबिक इलाके के अधिकांश खेत जुराई की चपेट में हैं। किसानों की ओर से दवा का छिड़काव किया जा रहा है लेकिन प्रकोप में अपेक्षित कमी नहीं दिखाई दे रही। वहीं निगोहां के किसान भरतलाल, सूरजलाल, भगवानपुर के रामदेव, देशराज, टेसू और सुरेश समेत दर्जनों किसान निगोहां कस्बे के बीज-भंडार केंद्रों पर दवा खरीदने के लिए पहुंचते दिखाई दिए।

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किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल अच्छी तैयार हो रही थी लेकिन कीट के हमले ने चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित खेतों में फसल पीली पड़ रही है। बढ़वार प्रभावित होने लगी है। इससे पैदावार में गिरावट की आशंका है। किसानों को डर है कि यदि प्रकोप नहीं थमा तो धान की खेती में लगी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

जड़ों से रस चूसकर पौधे को कमजोर करता है जुराई

कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीएन अवस्थी के मुताबिक जुराई कीट धान की नई सफेद जड़ों से रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है। प्रभावित जड़ें काली पड़कर सड़ने लगती हैं। इससे पौधा खाद और पानी का समुचित उपयोग नहीं कर पाता। इसके चलते फसल पीली पड़ सकती है। बढ़वार रुक सकती और नए कल्ले कम निकल सकते हैं। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका रहती है।
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पानी भरा रहने से बढ़ सकती है समस्या

कृषि जानकारों के अनुसार खेत में लगातार पानी भरा रखने से बचना चाहिए। दो-तीन दिन पानी निकालकर खेत को हल्का सुखाने और दरारें आने देने की सलाह दी जाती है। इससे कीट के नियंत्रण में मदद मिल सकती है। जड़ों के नष्ट होने से पौधे को यूरिया, डीएपी, पोटाश और पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता, जिससे फसल की सेहत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

कीटनाशक डालने से पहले पहचान जरूरी

नियंत्रण के लिए फटेरा (Chlorantraniliprole 0.4% GR) 4 किलो प्रति एकड़ या रीजेंट (Fipronil 0.3% GR) 5 किलो प्रति एकड़ को यूरिया में मिलाकर हल्की नमी वाले खेत में बिखेरने की सलाह दी गई है। क्लोरोपायरीफॉस 50% के साथ साइपरमेथ्रिन 5% EC की 300-400 मिली मात्रा को बालू में मिलाकर खेत में डालने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि किसान कीट की सही पहचान और फसल की स्थिति के आधार पर कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह तथा संबंधित उत्पाद के लेबल निर्देशों के अनुसार ही कीटनाशक का प्रयोग करें।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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