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यीडा में आकार ले रहा ‘मेडिकल डिवाइस पार्क’, UP बनेगा मैन्युफैक्चरिंग का नया ग्लोबल हब

पार्क में 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित, विकसित किए गए 203 इंडस्ट्रियल प्लॉट, 101 प्लॉट का आवंटन हो चुका, नए आवंटन की प्रक्रिया तेज, निवेश के लिए फिर खुले अवसर

लखनऊ, 4 फरवरी 2026:

यूपी अब मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-28 में 350 एकड़ में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क धरातल पर उतर चुका है। निवेश, प्लॉट आवंटन और निर्माण के स्तरों पर हो रही प्रगति इसे प्रदेश के औद्योगिक भविष्य का मजबूत आधार बना रही है।

मेडिकल डिवाइस पार्क के तहत औद्योगिक इकाइयों के लिए 188.15 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। इसमें 203 इंडस्ट्रियल प्लॉट विकसित किए गए हैं। अब तक 101 प्लॉट का आवंटन हो चुका है। यह निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यीडा की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार 85 निवेशकों ने लीज प्लान जमा किया जबकि 62 लीज डीड निष्पादित हो चुकी हैं। 49 यूनिट्स को साइट का पजेशन मिल चुका है और 23 इकाइयों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं। खास बात यह है कि 12 इकाइयों में निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इससे आने वाले समय में यहां उत्पादन शुरू होने की उम्मीद प्रबल हो गई है।

यह मेडिकल डिवाइस पार्क योगी सरकार के उस विजन का जीवंत उदाहरण है जिसमें प्रदेश को नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसे के दम पर निवेशकों का पसंदीदा राज्य बनाया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृतियां और नीति-स्थिरता को उद्योग जगत इस सफलता का प्रमुख कारण मान रहा है।

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यीडा इस परियोजना को केवल एक औद्योगिक क्लस्टर नहीं बल्कि एक फुल फ्लेज्ड इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के रूप में विकसित कर रहा है। पार्क में 9.02 एकड़ में वेयरहाउस प्लॉट, 18.66 एकड़ में ग्रीन एरिया, 46.43 एकड़ में कॉमन फैसिलिटी एरिया, 4.84 एकड़ में कमर्शियल सेक्टर और 79.10 एकड़ में पार्किंग व रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। इससे उत्पादन के साथ लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण संरक्षण और वर्कफोर्स सुविधाओं का संतुलन सुनिश्चित होगा।

मेडिकल डिवाइस पार्क में शेष उपलब्ध भूमि में से 10.32 एकड़ पर नए आवंटन के लिए गत 12 जनवरी को योजना शुरू की गई है। इसके तहत 22 नए प्लॉट प्रस्तावित हैं जिनके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी तय की गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना एक्सप्रेसवे की रणनीतिक लोकेशन, एयरपोर्ट इकोसिस्टम और उद्योगोन्मुख नीतियों के साथ यह परियोजना यूपी को मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग में राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकती है। यह पहल आयात पर निर्भरता घटाने के साथ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी नई मजबूती दे रही है।

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