Uttarakhand

NEET UG फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासा : फर्जी स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्र से तीन प्रवेश, SIT ने दो आरोपियों को दबोचा

13 सितंबर को रायपुर व क्लेमेंटाउन थानों में दर्ज हुए थे दो अलग-अलग मुकदमे, सरकारी पोर्टल पर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का था आरोप, टीम ने अभ्यर्थियों व दाखिले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 22 सितंबर 2026ः

उत्तराखंड में NEET UG के जरिए MBBS में दाखिले के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का देहरादून पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का लाभ दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर तीन अभ्यर्थियों के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले कराने के मामले में SIT ने मंगलवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपेश पंडित और अरविंद कुमार के रूप में हुई है।

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने मीडिया से बातचीत में फर्जीवाड़े का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 13 सितंबर 2026 को रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में दर्ज दो अलग-अलग मुकदमों से हुई। शिकायतों में आरोप था कि कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे। जांच के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया गया।

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जांच में दर्ज पते कथित तौर पर मिले गलत

टीम ने संबंधित अभ्यर्थियों और दाखिले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी जांच की। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते कथित तौर पर गलत पाए गए। इसके बाद SIT ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाए, जिनसे अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई। इसी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रूपेश पंडित (निवासी पूर्णिया बिहार, वर्तमान निवासी मेरठ, यूपी) और अरविंद कुमार (निवासी बहादरपुर खादर लक्सर, हरिद्वार) को पूछताछ के लिए बुलाया और बाद में गिरफ्तार कर लिया।

MBBS दाखिले के लिए 45 लाख रुपये की डील

पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से शिक्षा कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था और विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों व विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर प्रवेश दिलाने का काम करता था। पुलिस का दावा है कि अरविंद कुमार ने अपनी बेटी परी के MBBS दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके साथ ही उसने दो अन्य परिचितों के बच्चों के दाखिले की बात भी रखी।

आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से MBBS में दाखिला दिलाने के एवज में प्रत्येक से 45 लाख रुपये लेने की बात कही। तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। शेष रकम MBBS में दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले का आरोप

SIT की जांच के अनुसार रूपेश पंडित और उसके साथियों ने कथित तौर पर तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाए और उनके आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए गए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला हासिल किए जाने का आरोप है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच तेज कर दी है। SIT यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे व फर्जी प्रमाणपत्र और दाखिले की प्रक्रिया में किस स्तर पर मदद की गई।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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