
बाराबंकी, 24 सितंबर 2026:
यूपी के बाराबंकी में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। लखपेड़ाबाग निवासी विशाल ज्योति पाण्डेय को समाज कल्याण विभाग Samaj Kalyan Department में क्लर्क की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे और उसके रिश्तेदार अभिषेक उर्फ अंकित अवस्थी से 30 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद फर्जी Joining Letter देकर उसे लखनऊ स्थित समाज कल्याण निदेशालय में करीब चार महीने तक काम भी कराया गया। इस पूरे मामले को लेकर कोतवाली शहर में एफआईआर दर्ज की गई है।
दशहराबाग के दम्पती ने रची साजिश
शहर के मोहल्ला लखपेड़ाबाग में रहने वाले विशाल ज्योति के मुताबिक उसकी और रिश्तेदार अभिषेक की मुलाकात दशहराबाग पटेल नगर में रहने वाले दीपक पाण्डेय और उसकी पत्नी सोनी पाण्डेय के जरिए लखनऊ जानकीपुरम निवासी विद्या सागर मिश्रा से हुई थी। दीपक ने बताया कि विद्या सागर मिश्रा समाज कल्याण विभाग के बड़े अधिकारियों के संपर्क में हैं और पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवाते हैं। क्लर्क पद पर विशाल ज्योति और अभिषेक उर्फ अंकित अवस्थी की नौकरी लगवाने के लिए 30 लाख रुपये नकद के साथ पांच खाली चेक मांगे गए। नौकरी मिलने की उम्मीद में विशाल ने परिवार व रिश्तेदारों से रुपये जुटाए। दीपक पाण्डेय और सोनी पाण्डेय के सामने विद्या सागर मिश्रा को 30 लाख रुपये दिए गए। इसी दौरान दोनों युवकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र भी ले लिए गए।
मोबाइल पर भेजा Joining Letter
Fake Joining Letter: इसके बाद तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। 9 जनवरी 2025 को विशाल के मोबाइल पर एक Joining Letter भेजा गया। इसमें उसे समाज कल्याण विभाग के मुख्य कार्यालय, गोखले मार्ग, गोमतीनगर लखनऊ में योगदान आख्या देने के लिए कहा गया था।
लखनऊ समाज कल्याण निदेशालय में बैठाकर चार महीने कराया काम
विशाल के मुताबिक वह समाज कल्याण निदेशालय पहुंचा। वहां उसे तीनों आरोपी मिले। उसे कार्यालय के अंदर ले जाकर कुछ सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद उसी बिल्डिंग के एक कमरे में बैठाकर उससे काम कराया गया। करीब चार महीने तक वह वहां काम करता रहा। इसी दौरान उसके बैंक खाते में 20,220 रुपये वेतन के रूप में भी भेजे गए। इससे उसे नौकरी सही होने का भरोसा रहा।
निदेशालय से ही पता चला गोरखधंधा
विशाल का आरोप है कि वह लगातार अभिषेक उर्फ अंकित अवस्थी की नौकरी लगवाने के बारे में तीनों से पूछता रहा। उसे जल्द ही ज्वाइनिंग कराने का भरोसा दिया जाता रहा। काफी समय बीतने के बाद उसे मामले में गड़बड़ी की आशंका हुई। इसके बाद विशाल ने अभिषेक के साथ समाज कल्याण विभाग के मुख्य कार्यालय जाकर अपनी नियुक्ति के बारे में जानकारी की। वहां उसे पता चला कि विभाग में उसकी कोई नियुक्ति ही नहीं हुई थी। इसके बाद उसे फर्जी दस्तावेज के जरिए ठगी किए जाने का पता चला।
अब पैसे वापस मांगने पर जान लेने की धमकी
उसने अभिषेक के साथ आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगे। दबाव पड़ने पर विद्या सागर मिश्रा और दीपक पाण्डेय ने कुछ रकम वापस की, लेकिन बाकी रुपये लौटाने के लिए बार-बार समय लेते रहे। अब तक पूरी रकम वापस नहीं की गई है। शेष रकम मांगने पर तीनों आरोपी गाली-गलौज करते हैं। साथ ही फर्जी मुकदमे में फंसाने और हत्या कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है।
पांच चेक वापस नहीं किए, थाने व एसपी के बाद कोर्ट ने सुनी गुहार
शिकायत में विशाल ने यह भी कहा है कि आरोपियों के पास उसकी पांच चेक हैं, जिन्हें वापस नहीं किया गया है। उसे आशंका है कि इन चेक का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। विशाल ने मामले की जानकारी कोतवाली नगर पुलिस को दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक को खुद जाकर शिकायत दी। रजिस्टर्ड डाक से भी प्रार्थना पत्र भेजा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उसने कोर्ट का रुख किया। अब विशाल ज्योति पाण्डेय की ओर से दीपक पाण्डेय, सोनी पाण्डेय और विद्या सागर मिश्रा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।






