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TV डिबेट में अभद्र भाषा पर लगेगी लगाम, आपत्तिजनक बयान पर तुरंत म्यूट होगी आवाज, AI के इस्तेमाल पर भी सरकार सख्त

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नई एडवाइजरी में न्यूज चैनलों को संपादकीय नियंत्रण मजबूत करने की सलाह, आतंकवाद विरोधी अभियानों के लाइव प्रसारण और सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचने के निर्देश

न्यूज डेस्क, 22 अक्टूबर 2026:

टीवी न्यूज चैनलों की डिबेट में अभद्र भाषा, भड़काऊ बयानों और सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नई एडवाइजरी जारी कर चैनलों को कार्यक्रमों के प्रसारण के दौरान प्रभावी संपादकीय नियंत्रण रखने की सलाह दी है। इसके तहत बहस में किसी प्रतिभागी के आपत्तिजनक बयान देने पर उसकी आवाज तुरंत म्यूट करने, जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम रोकने, डिस्क्लेमर देने या प्रसारण की फीड काटने जैसे कदम उठाने को कहा गया है। मंत्रालय ने न्यूज रिपोर्टिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), खासकर जनरेटिव एआई के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी है।

बहस में शामिल होने वालों के चयन पर फोकस

मंत्रालय ने टीवी चैनलों की ओर से कार्यक्रम संहिता के कथित उल्लंघन पर चिंता जताई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि डिबेट और दूसरे कार्यक्रमों में शामिल होने वाले पैनलिस्टों तथा प्रतिभागियों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्हें पहले से तैयार करने और कार्यक्रम के दौरान निगरानी रखने जैसी संपादकीय व्यवस्थाएं भी मजबूत होनी चाहिए।

इसका उद्देश्य अपमानजनक, अभद्र, गाली-गलौज वाली या भड़काऊ सामग्री के प्रसारण को रोकना है। खास तौर पर ऐसी बहसों में सतर्क रहने को कहा गया है जिनमें सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका हो। यदि कोई प्रतिभागी आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो चैनल को स्थिति के अनुसार तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

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AI के इस्तेमाल में भी बरतनी होगी सावधानी

न्यूज चैनलों पर ग्राफिक्स तैयार करने, वर्चुअल न्यूज प्रस्तुत करने और अन्य प्रसारण संबंधी कामों में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मंत्रालय ने इस तकनीक के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई की मदद से तैयार की गई सामग्री दर्शकों को भ्रमित न करे और कार्यक्रम संहिता के अनुरूप हो।

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आतंकवाद विरोधी अभियानों का लाइव प्रसारण नहीं

एडवाइजरी में सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों के सीधे प्रसारण पर लागू प्रतिबंध को भी दोहराया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि अभियान समाप्त होने तक कवरेज अधिकृत अधिकारी की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी तक सीमित रखा जाना चाहिए। इसका मकसद अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के प्रसारण से बचना है।

इसके अलावा अपराध, हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं और बड़ी दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग में सनसनी फैलाने से परहेज करने को कहा गया है। परेशान करने वाले दृश्यों को सावधानी से दिखाने और उन्हें बार-बार या लूप में प्रसारित नहीं करने की सलाह दी गई है। आपदाओं और बड़े हादसों की खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर फुटेज पर तारीख और समय भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

पीड़ितों की पहचान और नक्शों पर भी निर्देश

मंत्रालय ने यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं करने और ऐसे अप्रत्यक्ष विवरणों से भी बचने को कहा है जिनसे उनकी पहचान सामने आ सकती है। इसके साथ ही चैनलों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग की ओर से प्रकाशित भारत के प्रामाणिक मानचित्रों का ही इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया गया है। मंत्रालय ने चैनलों को अपनी संपादकीय समीक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी है जिससे प्रसारित होने वाली सामग्री नियमों के अनुरूप रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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