Deepotsav : अयोध्या बनेगी विश्व रामलीला का मंच, मलयालम से डोगरी तक गूंजेंगे श्रीराम
रामनगरी में 6 और 7 नवंबर को 10 से 15 मंचों पर होगा रामलीला का आयोजन, मलयालम, असमिया और डोगरी भाषाओं में गूंजेगी रामकथा, फिलीपींस समेत कई राज्यों की टीमें लेंगी हिस्सा
लखनऊ/अयोध्या, 28 अक्टूबर 2026:
रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव की रौनक इस बार दीपों की जगमगाहट तक सीमित नहीं रहेगी। यहां देश-विदेश की कई रामलीला परंपराओं का अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा। दसवें दीपोत्सव के अवसर पर 6 और 7 नवंबर को संस्कृति विभाग की ओर से करीब 10 से 15 मंचों पर रामलीला का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं और पारंपरिक शैलियों के साथ विदेशी कलाकार भी रामकथा के प्रसंगों को जीवंत करेंगे। फिलीपींस की टीम की भागीदारी से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है।
इस सांस्कृतिक आयोजन में केरल, असम और जम्मू-कश्मीर की टीमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में रामलीला प्रस्तुत करेंगी। उत्तराखंड और बंगाल की रामलीलाएं भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। अलग-अलग राज्यों की लोक परंपराओं, अभिनय शैलियों और भाषाई विविधता के जरिए दर्शकों को रामकथा के विविध स्वरूपों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

मलयालम, असमिया और डोगरी में होगा रामकथा का मंचन
दसवें दीपोत्सव की खासियत यह होगी कि रामलीला के मंच से मलयालम, असमिया और डोगरी भाषाओं में भी श्रीराम की कथा सुनाई और दिखाई जाएगी। क्षेत्रीय कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर उतारेंगे। इससे अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को देश की सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझने का मौका मिलेगा। रामलीला की अलग-अलग शैलियां यह संदेश भी देंगी कि भाषा, वेशभूषा और प्रस्तुति का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन रामकथा के आदर्श देश के विभिन्न हिस्सों को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में पिरोते हैं।
आईसीसीआर के जरिए विदेशी कलाकारों को न्योता
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी के अनुसार भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के माध्यम से विदेशी रामलीला टीमों को आमंत्रित किया गया है। फिलीपींस की टीम की भागीदारी तय है जबकि अन्य देशों की टीमों को भी आयोजन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का मकसद दुनिया के विभिन्न देशों में प्रचलित रामलीला परंपराओं को एक मंच पर लाना और रामायण की वैश्विक सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है। इससे अयोध्या के दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का भी अवसर मिलेगा।
दीपोत्सव में दिखेगी साझा सांस्कृतिक विरासत
दीपोत्सव में रामलीला का आयोजन अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नया विस्तार देने के साथ देश-विदेश की परंपराओं के बीच संवाद का माध्यम बनेगा। दीपों से जगमगाती रामनगरी में विभिन्न भाषाओं और शैलियों में रामकथा का मंचन श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहेगा।






