UP Government Job में राजनीतिक विचारधारा नहीं बनेगी बाधा, शासनादेश पर नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट की स्थिति
चरित्र सत्यापन के शासनादेश पर विभाग ने स्पष्ट किया रुख, शांतिपूर्ण विरोध और सरकार की आलोचना को हिंसात्मक गतिविधियों से अलग रखने पर जोर, तीन साल की अवधि और सकारात्मक बदलाव के प्रावधान को भी समझना जरूरी

लखनऊ, 30 अक्टूबर 2026:
यूपी में सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से जुड़े शासनादेश को लेकर नियुक्ति विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार किसी अभ्यर्थी को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जा सकता। शासनादेश का उद्देश्य राजनीतिक असहमति या शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों के आधार पर अभ्यर्थियों को नौकरी से वंचित करना नहीं है।
प्रदेश के नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्रावधानों को उनके मूल आशय और संपूर्ण संदर्भ में समझना जरूरी है। नियम में राजनीतिक विचारधारा और हिंसात्मक गतिविधियों के बीच अंतर किया गया है। इसमें ऐसे संगठनों का उल्लेख है जिनका घोषित उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है। ऐसे संगठनों से जुड़ाव और संबंधित गतिविधियों पर निर्धारित नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।
पहले से लागू था नियम, नए शासनादेश में स्पष्टता
विभाग के मुताबिक चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित यह प्रावधान पहले के शासनादेश में भी मौजूद था। नए शासनादेश में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित प्रावधानों को एक साथ संकलित कर अधिक सरल और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य नियमों की व्याख्या और उनके एकरूप अनुपालन में स्पष्टता लाना है जिससे अभ्यर्थियों के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।
तीन साल की अवधि में बदलाव के प्रमाण भी अहम
संबंधित नियम के अनुसार 21 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद जांच की तारीख से पहले के तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भागीदारी को सक्रिय संलग्नता का प्रमाण मानने का प्रावधान है। हालांकि इस अवधि में व्यक्ति की प्रवृत्ति में सकारात्मक बदलाव के ठोस प्रमाण मिलने की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है।
शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा में अंतर
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना करना, राजनीतिक विचार रखना और शांतिपूर्ण विरोध करना अलग विषय हैं। इन्हें हिंसात्मक गतिविधियों के समान नहीं माना जा सकता। विभाग का जोर है कि शासनादेश को उसके पूरे पाठ और वास्तविक संदर्भ में पढ़ा जाए जिससे प्रावधानों का गलत अर्थ निकालकर सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों के बीच भ्रम न फैलाया जाए।






