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Varansi News : संस्कृति संसद में संतों का संगम, धर्म की रक्षा व युवाओं को दिशा देने पर होगा मंथन

Sanskriti Sansad 2026 : तीन दिन तक चलेगा आयोजन, चंपत राय के समर्थन में जितेंद्रानंद सरस्वती ने रखी बात, सात हजार से अधिक युवाओं को सनातन धर्म की जानकारी देने का लक्ष्य

वाराणसी, 3 नवंबर 2026:

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मंगलवार से तीन दिवसीय संस्कृति संसद 2026 की शुरुआत हो गई। देशभर से आए संतों की मौजूदगी में अखिल आनंद गुरुकुल विंध्याचल के बटुकों ने स्वस्तिवाचन किया। इसके बाद संतों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आयोजन में अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महामंत्री, विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार, चंपत राय समेत अलग-अलग संप्रदायों के संत-महंत शामिल हुए। जैन और सिख समाज के संतों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

राष्ट्र और धर्म के मुद्दों पर तीन दिन चर्चा

उद्घाटन सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती व शंकराचार्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती आदि ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि संस्कृति संसद का मुख्य मकसद राष्ट्र और धर्म से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना है। अगले तीन दिनों तक संत समाज इन दोनों विषयों को केंद्र में रखकर विचार करेगा। देश के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने के साथ उनसे निपटने के लिए आगे की रणनीति भी तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यहां सनातन हिंदू धर्म के अलग-अलग संप्रदायों के आचार्य, अखाड़ा परिषद, संत समिति, विद्वत परिषद के प्रतिनिधि जुटे हैं। ये सभी देश को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि, कर्मभूमि और पुण्यभूमि मानते हैं। संतों का प्रयास रहेगा कि देश और धर्म से जुड़े अहम मुद्दों पर मिलकर विचार किया जाए।

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सत्ता परिवर्तन के नाम पर गतिविधियों को लेकर जताई चिंता

जितेंद्रानंद सरस्वती ने देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों का आरोप लगाया। उन्होंने रिजीम चेंज की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के नाम पर देशविरोधी गतिविधियों के जरिए सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश कामयाब नहीं होगी। उन्होंने देश के विभाजन से जुड़ी कथित साजिशों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि भारत का कोई हिस्सा अलग नहीं होने दिया जाएगा।

चंपत राय के समर्थन में खुलकर बोले जितेंद्रानंद

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर जितेंद्रानंद सरस्वती ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संत समाज को चंपत राय पर पहले भी भरोसा था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के योगदान को उसके मौजूदा पद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि पिछले 35 वर्षों से चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और उससे जुड़े मुकदमे में पूरी निष्ठा से अपनी भूमिका निभाई है। अयोध्या में करीब 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण संभव होने में अशोक सिंघल के साथ चंपत राय की भी अहम भूमिका रही है। राम मंदिर आंदोलन में देश के हर हिंदू ने किसी न किसी रूप में योगदान दिया है। ऐसे में चंपत राय जैसे व्यक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं था।

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युवाओं को सनातन से जोड़ने पर खास जोर

आयोजन समिति के अध्यक्ष और भाजपा नेता सुनील देवधर ने उद्घाटन सत्र में युवाओं के बीच सनातन धर्म की सही जानकारी पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के सामने कई चुनौतियां हैं। आज के युवाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें अपनी परंपरा और धर्म की सही जानकारी देना जरूरी है।

देवधर ने 2014 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि जब नरेंद्र मोदी काशी से चुनाव लड़ने वाले थे, उस समय अमित शाह ने उन्हें और सुनील ओझा को वाराणसी भेजा था। उस दौरान अरविंद केजरीवाल के समर्थन में शबाना आजमी समेत वामपंथी कलाकार काशी पहुंचे थे। देवधर के मुताबिक, इसी दौर में उनकी मुलाकात जितेंद्रानंद सरस्वती से हुई। इसके बाद हिंदुत्व समर्थक कलाकारों और संतों को एक मंच पर लाकर संस्कृति परिषद शुरू करने का फैसला हुआ।

उन्होंने बताया कि संस्कृति परिषद के विस्तार के बाद अब इसका स्वरूप संस्कृति संसद के रूप में सामने आया है। देवधर ने दावा किया कि इस आयोजन के तीन दिनों में सात हजार से अधिक युवा हिंदुत्व और सनातन धर्म की जानकारी लेकर जाएंगे।

जेन-जी के भटकाव पर भी रखी बात

सुनील देवधर ने पश्चिमी देशों में प्रचलित जेन-जी जैसी अवधारणाओं को बेवकूफी बताते हुए कहा कि युवाओं में स्वाभाविक रूप से सवाल उठाने और विरोध करने की प्रवृत्ति होती है। उनके मुताबिक, माता-पिता की गलतियों और व्हाट्सऐप के दौर में अधूरी या गलत जानकारी मिलने के कारण युवा भटक रहे हैं। संस्कृति संसद के जरिए युवाओं तक सनातन धर्म की सही समझ पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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