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Lucknow Air Pollution : लखनऊ में दिवाली की सुबह AQI 350 पार, पटाखों का बारूद हवा में और घोलेगा जहर

राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों से उड़ती धूल बनी बड़ी वजह, दिल्ली-NCR में भी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

लखनऊ, 8 नवंबर 2026:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिवाली के दिन हवा की हालत और बिगड़ गई। सुबह पहली बार शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 के पार पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार शाम तालकटोरा में AQI 304 दर्ज किया गया था, जबकि शनिवार को आलमबाग 282 AQI के साथ शहर का सबसे प्रदूषित इलाका रहा। दिवाली पर आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है।

सुबह 350 पार पहुंचा AQI, कई इलाकों में बिगड़े हालात

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने रविवार का बुलेटिन जारी नहीं किया है लेकिन लाइव टेलीकास्ट 357 AQI बताया गया। लखनऊ में पिछले कुछ दिनों से हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार शाम तालकटोरा में AQI 304 दर्ज किया गया। यहां PM 2.5 का स्तर 152 और PM 10 का स्तर 203 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। शनिवार को आलमबाग में AQI 282, अलीगंज में 268 और तालकटोरा में 267 दर्ज किया गया। कुकरैल में यह आंकड़ा 152 और गोमतीनगर में 164 रहा। हालांकि दिवाली की सुबह शहर का AQI पहली बार 350 के पार पहुंचने से चिंता और बढ़ गई है।

32.8 लाख वाहनों का दबाव, सड़कों पर उड़ रही धूल

लखनऊ में प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों की बढ़ती संख्या भी बड़ी वजह है। राजधानी में हर साल करीब 1 से 1.5 लाख नए वाहन सड़कों पर जुड़ रहे हैं। दिसंबर 2025 तक पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब 31 लाख थी, जो इस साल धनतेरस तक बढ़कर 32 लाख पार कर गई।

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बाजारों, प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर लगने वाले जाम में वाहन लंबे समय तक चालू रहते हैं। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बारीक प्रदूषक कण हवा में फैलते हैं। पुराने वाहन भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर खुले में पड़ी मिट्टी, सड़कों की खुदाई और सफाई के बाद उड़ने वाली धूल भी हवा को दूषित कर रही है।

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दिल्ली का हाल दिखा सबसे खराब

दिल्ली-NCR में आज सुबह हवा की हालत खतरनाक स्तर तक खराब हो गई। यहां 11 मॉनिटरिंग स्टेशनों से 400 से ऊपर AQI दर्ज किया गया। बढ़ते वायु प्रदूषण का मामला भी गंभीर बना हुआ है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वाहनों से निकलने वाले धुएं और भारी ट्रैफिक को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया। कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर शहरी इलाकों में बढ़ते वाहन दबाव और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर ध्यान खींचा है।

लखनऊ और दिल्ली की परिस्थितियों में अंतर जरूर है, लेकिन दोनों जगह वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण से उड़ने वाली धूल और सर्दियों में हवा की कम रफ्तार प्रदूषण बढ़ाने वाले अहम कारण हैं।

ठंड के साथ बढ़ेगी परेशानी, पटाखों का धुआं भी चुनौती

विशेषज्ञों के मुताबिक तापमान गिरने और हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में ज्यादा समय तक बने रहते हैं। दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं स्थिति को और खराब कर सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और अस्थमा के मरीजों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे लोगों को सुबह-शाम बाहर व्यायाम करने से बचना चाहिए। बाहर निकलने पर N95 मास्क का इस्तेमाल करना बेहतर है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए मैदान में उतरी टीम

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी जेपी मौर्य के मुताबिक धूल हवा के दूषित होने की प्रमुख वजह है। पुराने वाहनों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। प्रदूषण पर नजर रखने के लिए विभाग की पांच सदस्यीय टीम रोजाना अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण कर रही है। विभाग की ओर से जरूरी कदम उठाए जाने की बात कही गई है।

फिलहाल दिवाली के दिन AQI का 350 पार पहुंचना राजधानी के लिए गंभीर संकेत है। आतिशबाजी के बाद हवा की गुणवत्ता पर इसका असर किस स्तर तक पहुंचेगा, इस पर नजर रहेगी।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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