Lucknow City

जूताकांड व निंदा प्रस्ताव पर नगर निगम में हंगामा : सदन बना अखाड़ा, विपक्ष का वॉकआउट, प्रस्ताव पास

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल के आवास पर अभद्रता से गरमाई सियासत, महिला आरक्षण से जुड़ा बिल पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाने पर भड़के विपक्ष के पार्षद, बुलाई गई पुलिस

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के नगर निगम में गुरुवार को विशेष सदन की बैठक सियासी टकराव का मैदान बन गई। बैठक शुरू होते ही सपा, कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हंगामे में बदल गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सपा और कांग्रेस के पार्षद सदन का बहिष्कार कर बाहर निकल गए जबकि भाजपा पार्षदों ने बहुमत के दम पर निंदा प्रस्ताव पारित करा दिया।

हंगामे की जड़ बुधवार को हुए उस विवाद से भी जुड़ी है जब महापौर सुषमा खर्कवाल के आवास पर सपा नेता द्वारा कथित तौर पर नेमप्लेट पर चप्पल मारने और कालिख पोतने की घटना सामने आई थी। इस घटना से नाराज महापौर ने सदन में भावुक होते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं आपके लिए बहन समान हूं, क्या आपकी पार्टी के लोगों का यह व्यवहार उचित है?

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सदन में माहौल तब और गरमा गया जब भाजपा पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्षद रामनरेश रावत ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए आक्रामक बयान दिया। हंगामे के बीच महापौर को पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद हजरतगंज कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा।

दरअसल, महापौर ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिल के पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाने के लिए यह विशेष बैठक बुलाई थी। विपक्ष ने इसे नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मुद्दा बताते हुए विरोध किया। उनका कहना था कि शहर की सफाई, जलनिकासी और विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दे उठाना अनुचित है।

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भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बावजूद 119 में से 83 पार्षदों के समर्थन से निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ की सियासत को और गरमा दिया है।

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