अनिल निषाद
अयोध्या, 5 जून 2026:
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को आने वाली कई पीढ़ियों तक सुरक्षित और भव्य बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर में विशेष केमिकल कोटिंग का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए मंदिर को नमी, फंगस और मौसम जनित क्षरण से बचाने की तैयारी की गई है ताकि इसकी मजबूती और सुंदरता लंबे समय तक बनी रहे।
राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित राम मंदिर के शिखर से लेकर आधार तक अंदर और बाहर दोनों ओर पारदर्शी सुरक्षात्मक लेप लगाया गया है। मंदिर निर्माण कर रही एलएंडटी के परियोजना निदेशक वीके मेहता के अनुसार, यह विशेष कोटिंग पत्थरों को पानी और नमी से होने वाले नुकसान से बचाने में कारगर साबित होगी।

उन्होंने बताया कि लगातार पानी के संपर्क में रहने से पत्थरों के भीतर नमी प्रवेश कर जाती है जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं। इसके अलावा फंगस और दाग-धब्बे भी पत्थरों की मजबूती और सुंदरता को प्रभावित करते हैं। नई तकनीक से लगाए गए इस लेप के बाद पानी की बूंदें पत्थरों पर ठहरने के बजाय सीधे नीचे बह जाएंगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे मंदिर के पत्थरों की प्राकृतिक आभा और सुंदरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस तकनीकी को ‘प्रोटेक्शन कोटिंग ऑफ सैंड स्टोन’ कहा जाता है। यही वजह है कि मुख्य मंदिर के साथ परकोटा और परिसर में बने सभी उप मंदिरों पर भी यह सुरक्षात्मक लेप लगाया गया है।
टाटा कंसल्टेंसी से जुड़े परियोजना निदेशक बीके शुक्ल ने बताया कि यह वाटर-बेस्ड रिपेलेंट तकनीक पर आधारित कोटिंग है सामान्य तौर पर ऐसी कोटिंग को स्थायी बनाने के लिए हीट ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है लेकिन अयोध्या की प्राकृतिक धूप ही इसके लिए पर्याप्त होगी।
इस बीच राम मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा 13 जून को अयोध्या पहुंचेंगे। उन्हें प्रतिदिन निर्माण कार्यों की ऑनलाइन रिपोर्ट भेजी जाती है जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचती है। पिछले पांच वर्षों से वह लगातार मंदिर निर्माण की निगरानी कर रहे हैं।






