Uttarakhand

कालसी की महिलाओं ने घानी से गढ़ी सफलता की कहानी, सरसों तेल कारोबार ने बदली तस्वीर

कालसी के हरीपुर गांव की महिलाओं ने सरसों तेल उत्पादन को बनाया कमाई का मजबूत जरिया, 764 महिलाओं से जुड़ा फेडरेशन अब स्थानीय बाजार से लेकर बड़े संस्थानों तक पहुंचा रहा अपना उत्पाद

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 7 जून 2026:

देहरादून जिले के कालसी विकासखंड का हरीपुर गांव आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की एक नई मिसाल बनकर सामने आया है। यहां महिलाओं ने सामूहिक प्रयास से सरसों तेल उत्पादन को ऐसा कारोबार बना दिया है, जिसने न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाई है बल्कि उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत पहचान भी दिलाई है।

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की ओर से संचालित कोल्ड और हॉट प्रेस्ड सरसों तेल यूनिट सितंबर 2024 में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना ग्रामोत्थान (रीप) के तहत शुरू की गई थी। करीब 10 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस यूनिट के लिए 6 लाख रुपये परियोजना सहायता, 3 लाख रुपये बैंक ऋण और 1 लाख रुपये महिलाओं के अंशदान से जुटाए गए थे।

आज इस यूनिट से तैयार सरसों तेल कालसी, विकासनगर और देहरादून तक पहुंच रहा है। लकड़ी की घानी से कोल्ड प्रेस्ड और मशीनों के जरिए हॉट प्रेस्ड सरसों तेल तैयार किया जाता है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

फेडरेशन के अंतर्गत 14 ग्राम संगठन, 120 स्वयं सहायता समूह और 764 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उत्पादन, पैकिंग, विपणन से लेकर प्रबंधन तक की जिम्मेदारी महिलाएं खुद संभाल रही हैं। यूनिट से हर महीने करीब 70 हजार रुपये की आय हो रही है। स्थापना के बाद से अब तक 24 से 25 लाख रुपये मूल्य का सरसों तेल बेचा जा चुका है। वहीं चार से पांच महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

Kalsi Women's Success Story How Mustard Oil Business Empowered Women (1)

महिलाओं का उत्पाद अब हिलान्स ब्रांड के नाम से बाजार में पहचान बना चुका है। गुणवत्ता के दम पर इसे बड़े संस्थानों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। हाउस ऑफ हिमालय ने यूनिट से 1700 लीटर सरसों तेल खरीदा, जिससे महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय हुई। इसके अलावा आईआईटी रुड़की को भी नियमित रूप से सरसों तेल की आपूर्ति की जा रही है।

वर्तमान में कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल 300 रुपये प्रति लीटर और हॉट प्रेस्ड तेल 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली सरसों की खल भी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनी हुई है। इसे किसानों और पशुपालकों को 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा है।

फेडरेशन से जुड़ी रीना चौहान बताती हैं कि अब सरसों तेल की बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से भी की जा रही है। यूनिट की जियो-मैपिंग की प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे उपभोक्ता भविष्य में सीधे यूनिट तक पहुंच सकेंगे। जिला परियोजना प्रबंधक रीप सोनम गुप्ता के अनुसार कालसी की यह सरसों तेल यूनिट ग्रामीण उद्यमिता का सफल मॉडल बनकर उभरी है। स्थानीय बाजार के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संस्थागत खरीदारों से मिल रहे बेहतर प्रतिसाद ने महिलाओं के कारोबार को नई दिशा दी है।

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