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हादसों पर लगाम लगाने की तैयारी, कार के सामने आया खतरा तो खुद लगेगा इमरजेंसी ब्रेक, जानें नया प्लान

नई कारों में AEBS लागू करने का प्रस्ताव, नए मॉडल अक्टूबर 2030 से नियमों के दायरे में आएंगे, पुराने मॉडल के लिए अक्टूबर 2032 की समयसीमा तय करने की तैयारी

न्यूज डेस्क, 24 अक्टूबर 2026:

Car Safety Rules India : भारत में सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार कारों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में बिकने वाली सभी नई कारों में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत नए कार मॉडल्स में अक्टूबर 2030 से यह सुविधा जरूरी करने की तैयारी है, जबकि पहले से बाजार में मौजूद मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2032 की समयसीमा प्रस्तावित है। इस तकनीक का मकसद उन हादसों को रोकना है, जिनमें ड्राइवर समय रहते ब्रेक नहीं लगा पाता।

खतरे को पहचानकर खुद ब्रेक लगाएगी कार

एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम आधुनिक कारों में इस्तेमाल होने वाली एक्टिव सेफ्टी तकनीक है। यह कैमरे, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर की मदद से सड़क पर सामने मौजूद वाहनों, पैदल यात्रियों या दूसरी रुकावटों पर नजर रखता है। ड्राइविंग के दौरान अगर कार के सामने अचानक कोई वाहन आ जाए या टक्कर होने का खतरा पैदा हो जाए, तो सिस्टम सबसे पहले ड्राइवर को अलर्ट करता है। इसके लिए स्क्रीन पर चेतावनी दिखाई जाती है, साथ ही आवाज के जरिए भी सावधान किया जाता है।

ड्राइवर की प्रतिक्रिया में देरी का जोखिम कम होगा

अगर ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता और टक्कर की आशंका बनी रहती है, तो सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा सकता है। इससे कार की रफ्तार कम हो सकती है या परिस्थितियों के अनुसार वाहन पूरी तरह रुक सकता है। इस तरह यह तकनीक ड्राइवर की प्रतिक्रिया में देरी से होने वाले हादसों का जोखिम कम करने में मदद करती है।

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ADAS तकनीक से बढ़ेगी कारों की सुरक्षा

AEBS, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का हिस्सा है। इस तकनीक के तहत कारों में ऐसे फीचर दिए जाते हैं, जो ड्राइविंग के दौरान संभावित खतरों की पहचान कर ड्राइवर को चेतावनी देते हैं या जरूरत पड़ने पर वाहन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

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New Car Safety Features : इनमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन डिपार्चर वार्निंग, इमरजेंसी लेन कीपिंग, ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन, ड्राइवर ड्राउजीनेस वार्निंग और मूविंग ऑफ इंफॉर्मेशन जैसे फीचर शामिल हैं। ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग संभावित टक्कर से पहले ब्रेक लगाने में मदद करती है। लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम कार के बिना संकेत दिए अपनी लेन से बाहर जाने पर ड्राइवर को अलर्ट करता है। वहीं, इमरजेंसी लेन कीपिंग तकनीक जरूरत पड़ने पर स्टीयरिंग में सुधार करके कार को लेन के भीतर रखने में मदद करती है।

ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन सिस्टम बनेगा मददगार

ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन सिस्टम उन वाहनों या अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के बारे में चेतावनी देता है, जो ड्राइवर को शीशों में आसानी से दिखाई नहीं देते। ड्राइवर ड्राउजीनेस वार्निंग फीचर नींद या सुस्ती के संकेत मिलने पर अलर्ट करता है। मूविंग ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम रुकी हुई कार को आगे बढ़ाते समय सामने मौजूद पैदल यात्रियों या साइकिल चालकों की पहचान कर ड्राइवर को सावधान कर सकता है।

टैक्सियों में भी सुरक्षा फीचर अनिवार्य करने की तैयारी

सरकार निजी कारों के साथ टैक्सियों की सुरक्षा पर भी ध्यान दे रही है। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ड्राइवर की थकान या ध्यान भटकने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए टैक्सियों में इमरजेंसी लेन कीपिंग और ड्राइवर फटीग अलर्ट जैसे फीचर अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। ड्राइवर फटीग अलर्ट का मकसद थकान के संकेत मिलने पर ड्राइवर को सावधान करना है। वहीं, इमरजेंसी लेन कीपिंग कार को अनजाने में लेन से बाहर जाने से रोकने में मदद करती है।

कमर्शियल वाहनों के लिए 2027 से नियम

भारी और मध्यम श्रेणी के कमर्शियल वाहनों के लिए भी सुरक्षा नियमों को सख्त किया जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, चुनिंदा कमर्शियल वाहनों में 1 अक्टूबर 2027 से एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम को अनिवार्य करने की समयसीमा तय की गई है। निजी कारों में इस तकनीक को लागू करने की प्रस्तावित समयसीमा इससे आगे रखी गई है। नए कार मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2030 और मौजूदा मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2032 का लक्ष्य रखा गया है। इन बदलावों के तहत वाहनों में ADAS तकनीक को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने की योजना है। हालांकि, प्रस्तावित समयसीमा के अंतिम नियमों में बदलाव की स्थिति में लागू होने की तारीखें अलग हो सकती हैं।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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