
बाराबंकी, 27 जुलाई 2026:
देवां इलाके में जमीन की धोखाधड़ी के आरोप में 14 लोगों के खिलाफ कोतवाली शहर में FIR दर्ज की गई है। मामला करीब 80 साल के अब्दुल हसन की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे उनके पिता मेहंदी हसन ने 1978 में देवां निवासी अख्तर अली से खरीदा था। शिकायत के मुताबिक, जमीन का बैनामा होने के बाद परिवार उस पर काबिज रहा, लेकिन आर्थिक तंगी और जानकारी के अभाव में दाखिल-खारिज नहीं कराया जा सका। इसी का फायदा उठाकर कई बैनामे हुए फर्जी गवाह बने और जमीन हथिया ली।
गाटा संख्या को लेकर शुरू हुआ विवाद
ग्राम सिपहिया में रहने वाले अब्दुल हसन ने प्रार्थना पत्र में बताया कि मूल रूप से खरीदी गई जमीन गाटा संख्या 544 थी। चकबंदी के बाद इसका नया गाटा संख्या 932 हो गया। उनके पिता अपने भाइयों आला बक्श व साजिद अली के साथ जमीन के संयुक्त खरीदार थे। बैनामा उपनिबंधक कार्यालय नवाबगंज में जिल्द संख्या 438 के पृष्ठ 166 से 169 पर क्रमांक 566 में 18 अप्रैल 1978 को दर्ज हुआ था।
पुराने विक्रेता के परिवार पर लगाया जमीन हड़पने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन का दाखिल-खारिज न होने की जानकारी का फायदा उठाकर मूल विक्रेता अख्तर अली के बेटों अफ्तर अली उर्फ लल्लन और अफजल अली उर्फ फुस्सन ने जमीन को लेकर अलग-अलग लोगों के पक्ष में फर्जी बैनामे करा दिए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह काम जमीन पर उनके परिवार के कब्जे की जानकारी होने के बावजूद किया गया।
पांच लोगों के पक्ष में फर्जी बैनामे का आरोप
शिकायत के मुताबिक, जमीन को लेकर दिलशाद अली, रजनीश कुमार सोनी, शैलेन्द्र कुमार, शारदा देवी और अजय कुमार के पक्ष में बैनामे कराए गए। इसके अलावा अफजल अली उर्फ फुस्सन पर मो खालिद के नाम इसी जमीन का कथित फर्जी इकरारनामा तैयार कराकर पंजीकृत कराने का भी आरोप लगाया गया है।
गवाहों की भूमिका भी जांच के घेरे में
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कथित बैनामों को पंजीकृत कराने के दौरान कई लोगों ने गवाह के तौर पर साथ दिया। इनमें जावेद, दिलशाद अली, गुड्डू, भारत जायसवाल, प्रेमचन्द्र, संतोष कुमार, शमशाद अली और सोनू कुमार के नाम शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन हड़पने की नीयत से खरीदार, विक्रेता और गवाहों ने मिलकर दस्तावेज तैयार कराए।
बाराबंकी के ऑफिस से प्लॉटिंग का काम करने का आरोप
अब्दुल हसन ने शिकायत में आरोप लगाया है कि अफजल अली उर्फ फुस्सन बाराबंकी में प्लॉटिंग से जुड़ा काम करते हैं। आरोप है कि जमीन की पूरी जानकारी होने के बावजूद अलग-अलग दस्तावेज तैयार कराकर उन्हें उपनिबंधक कार्यालय नवाबगंज में रजिस्टर्ड कराया गया। शिकायतकर्ता ने इसे संगठित तरीके से किया गया आर्थिक अपराध बताया है।

14 लोगों के नाम FIR में शामिल
मामले में अफजल अली उर्फ फुस्सन, मो खालिद, जावेद, दिलशाद अली, गुड्डू, भारत जायसवाल, प्रेमचन्द्र, संतोष कुमार, शमशाद अली, शारदा देवी, अजय कुमार, सोनू कुमार, रजनीश कुमार सोनी और शैलेन्द्र कुमार को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब जमीन के पुराने बैनामे, बाद की रजिस्ट्रियां, कथित इकरारनामा और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।
1978 के बैनामे से लेकर नई रजिस्ट्रियों तक जांच
मामले की जांच में सबसे अहम कड़ी 18 अप्रैल 1978 का मूल बैनामा है। इसके साथ गाटा संख्या 544 से बदलकर 932 हुए जमीन के रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज की स्थिति और बाद में हुए बैनामों की जांच की जाएगी। शिकायत में लगाए गए फर्जीवाड़े के आरोप सही हैं या नहीं, यह पुलिस की जांच में सामने आएगा।






