
अनिल निषाद
अयोध्या, 1 अक्टूबर 2026:
यूपी में विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2027 की आहट के बीच सियासी रिश्तों की पुरानी परतें एक बार फिर चर्चा में हैं। रामनगरी अयोध्या पहुंचे भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने दोनों नेताओं के पुराने व्यक्तिगत संबंधों को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि राजनीति में भले ही नेता अलग-अलग दलों में हों लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते अपनी जगह कायम रह सकते हैं। अखिलेश यादव से अपने पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘न तो वह हमारी बुराई करते हैं और न ही हम अखिलेश यादव की बुराई करते हैं।’
पूर्व सांसद के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब यूपी की सियासत में चुनाव से पहले नेताओं के आपसी संपर्क और राजनीतिक समीकरणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में किसी राजनीतिक गठजोड़, दल बदल या भविष्य के सियासी कदम की घोषणा नहीं की। उन्होंने केवल दोनों नेताओं के बीच पुराने व्यक्तिगत संबंधों की बात कही।

नेताओं के एक-दूसरे के संपर्क में होने के दावों पर भी बृजभूषण ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में इस तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं। कभी भाजपा की ओर से कहा जाता है कि सपा के विधायक संपर्क में हैं तो कभी सपा की ओर से भाजपा के विधायकों के संपर्क में होने की बात कही जाती है।
बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक रिश्तों की चर्चा केवल अखिलेश यादव तक सीमित नहीं रही है। सपा संस्थापक स्व. मुलायम सिंह यादव के साथ भी उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर वह कई बार सार्वजनिक रूप से चर्चा कर चुके हैं।
ऐसे में बृजभूषण का ताजा बयान चुनावी गठजोड़ की घोषणा तो नहीं है लेकिन यूपी की राजनीति में दलगत विरोध के बीच व्यक्तिगत रिश्तों की भूमिका को जरूर सामने लाता है। अब उनके इस बयान को लेकर सियासी गलियारों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।






