
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 28 सितंबर 2026ः
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को यूपी और उत्तराखंड में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया। इसी क्रम में देहरादून में भी कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही जमकर नारेबाजी की। उधर,SIR को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर बीजेपी ने पलटवार किया। कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों व आधिकारिक दस्तावेजों को सामने रखना भी जरूरी है।

कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं के विरोध में जमकर नारेबाजी की। साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली और घंटाघर में केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। इस दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया को दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित सत्यापन और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा, कई मांगों की जांच की मांग
प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियों के निस्तारण की शिकायतों की जांच की मांग की गई। साथ ही फॉर्म-7 आवेदनों का विधानसभा क्षेत्र एवं बूथवार विवरण सार्वजनिक करने और असामान्य संख्या में फॉर्म-7 दाखिल करने वाले मामलों की विशेष जांच की मांग रखी गई। प्रदर्शन में प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, ज्योति रौतेला, मदन लाल, प्रतिमा सिंह, अभिनव थापर, प्रवीण त्यागी टीटू, नीनू सहगल, अर्जुन पासी, सावित्री थापा, गुलशन सिंह, सुनील जायसवाल, जितेंद्र तनेजा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखा
उधर, महापौर ने अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि 24 जून 2025 को निर्वाचन आयोग ने बिहार में SIR का आदेश जारी किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखा। ऐसे में SIR को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों पर कांग्रेस को अपने दावों का कानूनी और तथ्यात्मक आधार स्पष्ट करना चाहिए। सौरभ थपलियाल ने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था की प्रक्रिया पर सवाल उठाना और बिना पर्याप्त तथ्य के उस पर लगातार आरोप लगाना दो अलग बातें हैं। उन्होंने कांग्रेस से अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य और दस्तावेज सार्वजनिक करने को कहा। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सामने है। अब कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके आरोप किस तथ्य व किस दस्तावेज पर आधारित हैं।

प्रशासनिक पत्रों को लेकर उठाए सवाल
महापौर ने कहा कि किसी अधिकारी के प्रशासनिक पत्र अथवा डेपुटेशन से जुड़े दस्तावेज को SIR की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने से पहले उसके संदर्भ और आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना आवश्यक है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और पक्ष जनता के सामने रखने की आवश्यकता बताई। थपलियाल ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत होती है। उन्होंने कहा कि पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में बड़ी संख्या में कर्मचारी जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभाते हैं। यदि किसी स्तर पर तथ्यात्मक शिकायत है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए।
EVM, सर्जिकल स्ट्राइक के बयानों का भी किया उल्लेख
महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अतीत में EVM, सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक को लेकर दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेना की कार्रवाई और निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषय अत्यंत संवेदनशील हैं और राजनीतिक दलों को ऐसे मामलों में सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यात्मक जिम्मेदारी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते समय आरोपों के साथ तथ्य भी सामने आने चाहिए।






