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प्रोडक्शन से प्रॉस्पेरिटी तक : लखनऊ में कृषि क्रांति का रोडमैप, CM योगी का बड़ा विजन

कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 में बोले मुख्यमंत्री- तकनीक, प्राकृतिक खेती और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बदलेगा खेती का भविष्य, किसान बनेगा समृद्ध

लखनऊ, 8 अप्रैल 2026:

यूपी राजधानी लखनऊ में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के मंच से बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के लिए एक व्यापक और दूरदर्शी विजन पेश किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे प्रोडक्शन से प्रोडक्टिविटी, प्रोडक्टिविटी से प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉफिटेबिलिटी से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे लाभकारी और टिकाऊ बनाना भी उतना ही जरूरी है।

तीन दिवसीय इस कृषि विज्ञान कांग्रेस को उन्होंने केवल चर्चा का मंच न मानते हुए इसे एक्शन प्लान तैयार करने का अवसर बताया। उनका कहना था कि यहां जमीनी अनुभव, नवाचार और सफल प्रयोगों को साझा कर किसानों के लिए ठोस नीतियां बनाई जानी चाहिए।

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सीएम ने उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता को रेखांकित करते हुए बताया कि मात्र 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21 प्रतिशत योगदान दे रहा है। उन्होंने इसे किसानों की मेहनत और योजनाबद्ध नीतियों का परिणाम बताया। साथ ही कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि बताया।

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उन्होंने कृषि के स्वर्णिम अतीत का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में 44-45 प्रतिशत हिस्सेदारी थी जिसका आधार मजबूत कृषि तंत्र था। उस दौर में किसान केवल उत्पादक नहीं बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई। किसान कच्चे माल का उत्पादक बनकर रह गया।

आधुनिक तकनीक को खेती का भविष्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से फसलों का रियल-टाइम विश्लेषण, रोगों की पहचान, सटीक छिड़काव और मौसम की निगरानी संभव हो रही है। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक बन रही है।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी और प्राकृतिक खेती को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार प्राकृतिक खेती लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म और ‘वन नेशन-वन मंडी’ व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब किसानों को बाजार, मौसम और कीमत की जानकारी सीधे मिल रही है।

डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड से किसानों को अपनी जमीन की गुणवत्ता की सटीक जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध हो रही है। सीएम ने ‘लैब टू लैंड’ की पारंपरिक अवधारणा को बदलते हुए ‘लैंड इज लैब’ मॉडल पर जोर दिया, जिसमें खेतों को ही प्रयोगशाला बनाकर किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार करेंगे।

गन्ना किसानों के संदर्भ में उन्होंने बताया कि अब 122 में से 107 मिलें 6-7 दिनों में भुगतान कर रही हैं और प्रदेश देश के कुल गन्ना उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत योगदान दे रहा है। साथ ही, ₹3.15 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किसानों को किया जा चुका है। सिंचाई के क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में 85-86 प्रतिशत भूमि सिंचित है और सरयू नहर परियोजना से 14 लाख हेक्टेयर भूमि को लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2017 से पहले कृषि क्षेत्र अव्यवस्था और अविश्वास का प्रतीक बन गया था, लेकिन अब पारदर्शी नीतियों, एमएसपी पर प्रभावी खरीद और डीबीटी के जरिए भुगतान से किसानों का भरोसा बढ़ा है और कृषि एक सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में उभरी है।

उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को अत्यंत आवश्यक बताया और कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण को मजबूत कर देश आर्थिक रूप से और सशक्त बन सकता है। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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