
लखनऊ, 19 सितंबर 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा गोमती पुस्तक महोत्सव सातवें दिन किताबों की दुनिया से निकलकर नदी, पर्यावरण, इतिहास, अनुवाद, सैन्य जीवन और स्वतंत्रता संग्राम तक पहुंचा। ‘मैं तुम्हारी गोमती हूं,, ‘अनुवाद : संस्कृति के सेतु’, कल्हण कृत राजतरंगिणी पर आधारित किशोर उपन्यास शृंखला और ‘Force Fable : Crafted by the Olive’ जैसे सत्रों में गंभीर विमर्श हुआ। भारतेन्दु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने ‘काकोरी एक्शन’ नाटक के जरिए स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण अध्याय को मंच पर जीवंत कर दिया। वहीं चिल्ड्रन्स कॉर्नर में विभिन्न स्कूलों के करीब 1,000 विद्यार्थियों ने कहानी, कैलीग्राफी, कैरिकेचर और आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधियों में हिस्सा लिया।
कहानी, कैलीग्राफी और कैरिकेचर में बच्चों की धमाल
महोत्सव में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अनीता भटनागर जैन का स्टोरीटेलिंग सत्र खास रहा।कहानी के जरिए बच्चों को पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरूक किया गया। कहानी आधारित क्विज में विजेताओं को किताबें दी गईं। कैलीग्राफी आर्टिस्ट आयशा इमरान ने सुंदर अक्षर लिखने की तकनीकें सिखाईं। कलाकार शुभम विश्वकर्मा की कैरिकेचर वर्कशॉप में बच्चों ने अपने दोस्तों के चित्र बनाए।

‘गोमती को बचाना है तो नदी को जगह देनी होगी’
‘मैं तुम्हारी गोमती हूं’ संवाद में गोमती और उसकी सहायक नदियों के इतिहास, पर्यावरणीय महत्व और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा हुई। डॉ. मीनू खरे ने गोमती से जुड़े ऐतिहासिक और भावनात्मक पक्ष सामने रखे। नदी विशेषज्ञ एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता ने कहा कि नदी महज पानी की धारा नहीं, बल्कि जीवंत और गतिशील जैविक तंत्र है। उन्होंने कहा कि नदी की जमीन पर निर्माण और परियोजनाओं से उसका प्राकृतिक क्षेत्र सीमित हुआ है। गोमती के संरक्षण के लिए उसके प्रवाह, तट और प्राकृतिक इकोसिस्टम को पर्याप्त जगह देना जरूरी है। संवाद में अंग्रेजी शासनकाल के गजट में लखनऊ क्षेत्र में गोमती की दस सहायक नदियों के उल्लेख और चारबाग क्षेत्र के निर्माण से नदी के स्वरूप पर पड़े प्रभाव पर भी चर्चा हुई।
अनुवाद सिर्फ शब्द नहीं, संस्कृति का सेतु
‘अनुवाद : संस्कृति के सेतु’ सत्र में सूर्यकांत शर्मा, प्रितपाल कौर और स्मिता सिन्हा ने अनुवाद की भूमिका और चुनौतियों पर विचार रखे। पल्लवी विनोद ने कहा कि अनुवाद भाषाओं के साथ संस्कृतियों और क्षेत्रों के लोगों को जोड़ता है। सूर्यकांत शर्मा ने इसे नदी पर बने पुल से जोड़ते हुए मुहावरों, लोकोक्तियों और सांस्कृतिक संदर्भों के सही रूपांतरण को जरूरी बताया। स्मिता सिन्हा ने मूल कृति की आत्मा बचाए रखने पर जोर दिया। प्रितपाल कौर ने कहा कि अनुवाद भाव और संवेदना को दूसरी भाषा तक पहुंचाने की प्रक्रिया है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भी संवेदना को पूरी तरह बनाए रखना चुनौती है।

राजतरंगिणी से इतिहास की सीख, फौजी जीवन पर भी संवाद
राजतरंगिणी आधारित किशोर उपन्यास शृंखला में चंद्रकांता के समन्वय में इतिहास को किशोरों तक रोचक ढंग से पहुंचाने पर चर्चा हुई। सुधाकर अदीब और मलिक राजकुमार ने इतिहास, लोक साहित्य और बदलती युवा रुचियों के संदर्भ में बात रखी।
‘Force Fable’ में नवनीत ग्रेवाल और आरजे प्रतीक ने सैन्य जीवन, अनुशासन, त्याग और परिवार की चुनौतियों पर संवाद किया। नवनीत ग्रेवाल ने कहा कि सेना में देश सबसे पहले है और युद्ध में सिर्फ सैनिक नहीं, पूरा परिवार त्याग करता है।
‘काकोरी एक्शन’ से गूंजा बलिदान का इतिहास
‘काकोरी एक्शन’ नाटक ने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के दौर में पहुंचा दिया। क्रांतिकारियों के साहस, संघर्ष और बलिदान को प्रभावी अभिनय और मंचन के जरिए प्रस्तुत किया गया। काकोरी घटना से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों ने दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस अध्याय से फिर रूबरू कराया। कलाकारों के सशक्त अभिनय के साथ प्रस्तुति का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ।






