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ढोल-नगाड़ों के बीच रिश्तों का राज, महाराष्ट्र की सदियों पुरानी रस्म पर बनी ‘गोंडल’ की OSCAR में एंट्री

ढोल, भक्ति गीत, नृत्य से सजी धार्मिक रस्म, शादी जैसे पारिवारिक मौकों पर भी होता है आयोजन, इसी लोकपरंपरा को संतोष दावखर ने बनाया Psychological Thriller की कहानी का आधार

एंटरटेनमेंट डेस्क, 19 सितंबर 2026:

मराठी फिल्म गोंधल को Oscars 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी यह Psychological Thriller महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक लोकपरंपरा गोंधल के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म की कहानी में रात के समय होने वाली यह रस्म सिर्फ एक आयोजन नहीं रहती, बल्कि रिश्तों, धोखे, विश्वासघात और रहस्य को आगे बढ़ाने वाला अहम हिस्सा बन जाती है।

क्या है गोंधल की परंपरा

गोंधल महाराष्ट्र की पारंपरिक धार्मिक रस्म है। इसमें भजन, संगीत, नृत्य के साथ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इस रस्म को आमतौर पर गोंधली समुदाय के लोग करते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य के जरिए देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। गोंधल का आयोजन खास तौर पर रात के समय होने वाली रस्मों से जुड़ा रहा है। महाराष्ट्र में शादी जैसे पारिवारिक मौकों पर भी इसका आयोजन किया जाता है। ढोल, तुंतुणे, दूसरे धातु के वाद्य, मशाल या दीपक की रोशनी इस आयोजन का हिस्सा होते हैं। आखिर में आरती के साथ रस्म पूरी होती है।

सिर्फ पूजा नहीं, पूरा गांव जुटता है

महाराष्ट्र में गोंधल को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं देखा जाता। लंबे समय से यह धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों का हिस्सा रहा है। रस्म के दौरान परिवार के साथ आसपास के लोग भी जुटते हैं। रातभर गीत, संगीत, नृत्य और पूजा का माहौल बना रहता है। गोंधल की खासियत इसका सामुदायिक स्वरूप भी है। ढोल की आवाज, दीपक की रोशनी, पारंपरिक नृत्य और भक्ति गीत इसे अलग पहचान देते हैं। इसे निभाने वाले समुदायों के लिए इसका धार्मिक महत्व भी है।

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फिल्म में इसी रात से शुरू होती है कहानी

संतोष दावखर ने इसी लोकपरंपरा को गोंधल की कहानी का केंद्र बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है। फिल्म में इशिता देशमुख सुमन का किरदार निभा रही हैं। सुमन एक अमीर परिवार में शादी के बाद अपनी जिंदगी को लेकर परेशान है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है। इसके बाद सुमन की जिंदगी में घटनाएं तेजी से बदलती हैं। रिश्तों के बीच धोखा, विश्वासघात और तनाव बढ़ता जाता है। कहानी आगे चलकर हत्या की साजिश तक पहुंचती है। इस पूरे घटनाक्रम में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह अहम भूमिका निभाता है।

बचपन से गोंधल देखते आए हैं निर्देशक

संतोष दावखर बचपन से गोंधल के आयोजन देखते आए हैं। इसी अनुभव ने उन्हें इस परंपरा को फिल्म की कहानी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महाराष्ट्र की लोकपरंपरा के धार्मिक और सामुदायिक पहलुओं को Psychological Thriller के साथ जोड़ा है। फिल्म में गोंधल की रस्म कहानी के माहौल तक सीमित नहीं है। रात, ढोल की आवाज, दीपक की रोशनी, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान के बीच किरदारों के रिश्तों में चल रहा तनाव सामने आता है। इस तरह सदियों पुरानी रस्म कहानी के रहस्य को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती है।

33 फिल्मों के बीच चुनी गई गोंधल

इस साल ऑस्कर की दावेदारी के लिए देश की अलग-अलग भाषाओं की 33 फिल्में भेजी गई थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्में थीं। मराठी, तेलुगू और गुजराती से चार-चार फिल्में, तमिल से तीन फिल्में, जबकि मलयालम व नागामी भाषा से एक-एक फिल्म शामिल थी। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इसके लिए विशेष जूरी बनाई थी। इसी जूरी ने गोंधल को 99वें Academy Awards यानी Oscars 2027 में Best International Feature Film कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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