
हरदोई, 30 अगस्त 2026:
यूपी के हरदोई जिले में कछौना क्षेत्र के रैसो गांव की जमीन के बैनामे को लेकर चल रहा विवाद अब FIR तक पहुंच गया है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार सोनी की शिकायत पर एंटी फ्रॉड सेल ने जांच की। जांच के बाद एहसान व मुन्ने के खिलाफ धारा 420 में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। इससे पहले एहसान व मुन्ने ने भाजपा नेता पर एफआईआर कराई थी।

1.25 करोड़ की जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद
रैसो निवासी एहसान ने कुछ समय पहले पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर संडीला के अशरफ टोला निवासी भाजपा नेता महेंद्र कुमार सोनी समेत नौ लोगों पर दस्तावेजों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया था। शिकायत में करीब 1.25 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया गया था। एहसान के मुताबिक वर्ष 2024 में जमीन का सौदा 1.25 करोड़ रुपये में तय हुआ था। उनका आरोप था कि 11 महीने का registered agreement कराने की बात कहकर दस्तावेज तैयार कराए गए। बाद में बैनामे से जुड़े कागजों में कथित तौर पर बदलाव कर जमीन की कीमत कम दिखा दी गई।
87 लाख की चेक बाउंस होने का दावा
शिकायत के मुताबिक सण्डीला रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन का बैनामा कराया गया। एहसान ने दावा किया था कि सौदे के बदले 20 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी रकम के लिए चेक दी गई थी। इनमें 87 लाख रुपये की चेक बाउंस होने की बात भी शिकायत में कही गई थी। बाद में दस्तावेज के एक पेज को बदलकर जमीन की बिक्री कीमत 15 लाख रुपये कर दी गई। उन्होंने सण्डीला तहसील में धमकी दिए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद आरोपियों के घर पहुंचकर 19.50 लाख रुपये ले जाने का दावा भी किया गया था।

महेंद्र सोनी बोले, रोड साइड की जमीन के बदले पीछे की जमीन का बैनामा
इसके बाद महेंद्र कुमार सोनी ने एसपी से मुलाकात कर दस्तावेज सौंपे और बताया कि एहसान के आरोप गलत है। रैसो गांव में उन्होंने रोड साइड की जमीन का सौदा किया था, लेकिन बैनामा पीछे की जमीन का करा दिया गया। एसपी ने एंटी फ्रॉड सेल को जांच के निर्देश दिये। इसके बाद कछौना थाने में एहसान और मुन्ने पर धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई। इसमें कहा गया है कि उन्होंने अहसान और मुन्ने से भूमिखंड संख्या 537 मि., रकबा 0.5000 का विक्रय पत्र 28 अगस्त 2025 को कराया था।
लखनऊ-हरदोई मार्ग पर है कीमती जमीन
उनका आरोप है कि संबंधित भूमि के नंबर में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव का आदेश पहले ही पारित हो चुका था। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष ने कथित तौर पर इस जानकारी को छिपाकर भूमि का नंबर अलग तरीके से दर्शाया और लखनऊ-हरदोई मार्ग स्थित भूमि बताते हुए बैनामा करा दिया। महेंद्र सोनी का कहना है कि जमीन के मामले से पीछे हटने का दबाव बनाने के लिए उन्हें अलग-अलग जगह शिकायतों के जरिए बदनाम करने की कोशिश की गई।






