
लखनऊ, 9 अगस्त 2026:
काकोरी ट्रेन एक्शन की ऐतिहासिक गूंज लखनऊ के राज्य संग्रहालय में रंगों और कैनवास के जरिए फिर सुनाई दी। स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को समर्पित कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता में युवाओं ने काकोरी के शौर्य को अपनी कल्पनाशीलता और कला के रंगों में उतार दिया। प्रतियोगिता में 65 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर क्रांतिकारियों के साहस और आजादी के आंदोलन की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
राज्य संग्रहालय की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में राज्य ललित कला अकादमी, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय समेत विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों की बनाई कलाकृतियों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसे अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने खूब सराहा।
कैनवास पर कहीं काकोरी ट्रेन एक्शन की ऐतिहासिक घटनाएं उभरीं तो कहीं क्रांतिकारियों के अदम्य साहस, संघर्ष और देशभक्ति की भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया। इन चित्रों ने दर्शकों का ध्यान खींचने के साथ उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की याद भी दिलाई, जब देश की आजादी के लिए युवाओं ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था।
निर्णायक मंडल ने उत्कृष्ट कृतियों का चयन कर विजेताओं की घोषणा की। प्रथम पुरस्कार फाइन आर्ट विभाग, गोयल इंस्टीट्यूट लखनऊ की छात्रा रिया जायसवाल ने हासिल किया। द्वितीय पुरस्कार अनुराग गुप्ता, टेक्नो ग्रुप ऑफ हायर स्टडीज, लखनऊ और तृतीय पुरस्कार यशस्वी सिंह, राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ को मिला। वहीं अंकित द्विवेदी और श्रेया सिंह, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय तथा सोनाली कुमारी, टेक्नो ग्रुप ऑफ हायर स्टडीज को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य ललित कला अकादमी की निदेशक.डॉ. श्रद्धा शुक्ला ने प्रतिभागियों की कला की सराहना करते हुए कहा कि कला महज अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ ही इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त जरिया भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की कृतियों में काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना साफ दिखाई देती है।
राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य संग्रहालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। कार्यक्रम का संचालन राज्य संग्रहालय की प्रदर्शक व्याख्याता डॉ. अनिता चौरसिया ने किया।






