लेखक गांव में अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का आगाज, देश-विदेश के जुटे साहित्यकार
राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया महोत्सव का उद्घाटन, ‘लेखक गांव कॉफी टेबल बुक’ व ‘लेखक गांव सृजन यात्रा 2025-26’ पुस्तकों का हुआ विमोचन, पांच दिन चलेगा कार्यक्रम, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन हुए शामिल
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 26 अक्टूबर 2026ः
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानों स्थित लेखक गांव में अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026 का आगाज हुआ। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में देश-विदेश के साहित्यकार, कलाकार, विद्वान और संस्कृति से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान साहित्य, कला, संस्कृति, भाषा और पर्यावरण जैसे विषयों पर विमर्श के साथ संवाद होगा। महोत्सव का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया। उन्होंने कहा कि साहित्य, संस्कृति और कला मानवता को जोड़ने के सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजन साहित्यिक सृजन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विभिन्न देशों के बीच संवाद को नई दिशा देते हैं।

‘युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना जरूरी’
राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय भाषाओं में साहित्य सृजन, अनुवाद, शोध और प्रकाशन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। हिमालय के पर्यावरण, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को भी साहित्यिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के ज्ञान, संस्कार और सृजनशीलता पर निर्भर करता है। इसलिए युवाओं को पुस्तकों से जोड़ने के साथ मातृभाषा के प्रति सम्मान और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाना आवश्यक है।
लेखक गांव के संस्थापक भी महोत्सव में पहुंचे
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ‘लेखक गांव कॉफी टेबल बुक’ और ‘लेखक गांव सृजन यात्रा 2025-26’ पुस्तकों का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल के कुलाधिपति एवं साहित्यकार संतोष चौबे, ब्रिटेन के प्रवासी साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा और लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक सहित देश-विदेश से आए साहित्यकार एवं विद्वान मौजूद रहे।






