लखनऊ, 8 अगस्त 2026:
नशे के खिलाफ जागरूकता की मुहिम अब सरकारी अभियानों से आगे बढ़कर जनभागीदारी का रूप ले रही है। इसी क्रम में शनिवार को जन भवन (राजभवन) से ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत साइकिल रैली निकाली गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देशन में आयोजित इस रैली में जन भवन के करीब 150 कार्मिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। साइकिलों पर सवार प्रतिभागियों ने लखनऊ की सड़कों पर नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया और लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहभागी बनने की अपील की।
रैली जन भवन से रवाना होकर लखनऊ के विभिन्न वार्डों से गुजरती हुई पुन: जन भवन पहुंचकर समाप्त हुई। रास्ते में रैली के विभिन्न पड़ावों पर आम लोगों को नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और परिवारों को इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
सरकारी अभियान से आगे बढ़ी जनभागीदारी
योगी सरकार के कार्यकाल में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक भागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। साइकिल रैली इसी सोच की तस्वीर बनी। जन भवन के कार्मिक स्वयं सड़क पर उतरे और लोगों के बीच पहुंचकर नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया।

रैली के विभिन्न मार्गों से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान इसकी ओर आकर्षित हुआ। प्रतिभागियों ने लोगों को समझाया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक संबंधों और पूरे समाज के वातावरण पर भी प्रतिकूल असर डालता है। अभियान के माध्यम से स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।
हर नागरिक की भूमिका अहम
राज्य मद्यनिषेध अधिकारी आरएल राजवंशी ने कहा कि ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि साइकिल रैली के माध्यम से जनसामान्य तक यह संदेश पहुंचाया गया कि स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
रैली में राज्यपाल के विशेष कार्य अधिकारी सुधीर एम. बोबड़े, पार्षद नागेंद्र चौहान, पार्षद अमित चौधरी समेत कई लोगों ने भी सहभागिता की। रैली ने नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प को मजबूत करते हुए यह संदेश दिया कि जागरूकता और जनभागीदारी के जरिए ही नशामुक्त समाज की दिशा में प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।






