
एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 6 अगस्त 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में इन दिनों हजारों किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी परेशानी खाद की कमी नहीं बल्कि तकनीकी व्यवस्था बन गई है। नगराम और निगोहां क्षेत्र की कई साधन सहकारी समितियों में इंटरनेट सर्वर ठप होने से यूरिया और डीएपी का वितरण घंटों बाधित रहा। गोदामों में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद ई-पॉस मशीनों में नेटवर्क और सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी के कारण किसानों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ा।
बुधवार और गुरुवार को देवती, बैरिसालपुर, निगोहां, समेसी, नगराम दक्षिण, इस्मालनगर, बहरौली और गढ़ा साधन सहकारी समितियों पर सुबह करीब 10 बजे से ही लगभग तमाम किसान खाद लेने पहुंच गए थे। हालांकि ई-पॉस मशीनों में सर्वर उपलब्ध न होने के कारण वितरण शुरू नहीं हो सका। किसान सुबह से दोपहर तक समितियों के बाहर इंतजार करते रहे।
तकनीकी समस्या कुछ समितियों में दोपहर बाद दूर हो सकी। निगोहां और समेसी समितियों में करीब तीन बजे सर्वर चालू होने के बाद खाद वितरण शुरू हुआ, जबकि नगराम दक्षिण, इस्मालनगर, बहरौली और गढ़ा समितियों में लगभग एक बजे के बाद किसानों को खाद मिलनी शुरू हुई। इससे किसानों को कई घंटे तक धूप और उमस में इंतजार करना पड़ा।
किसान रामफल, महेश, राजेश, द्वारिका, मलखान, श्रीकृष्ण और रतिपाल समेत दर्जनों किसानों ने बताया कि धान की फसल इस समय बढ़वार के अहम दौर में है। यूरिया की सबसे अधिक जरूरत है। पिछले कई दिनों से सर्वर की समस्या के कारण समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि खाद मिलने में हो रही देरी से धान की फसल की ग्रोथ प्रभावित हो रही है और यदि यही स्थिति बनी रही तो पैदावार पर भी सीधा असर पड़ सकता है।

किसानों ने बताया कि उन्हें रोजाना समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद बिना खाद लिए वापस लौटना पड़ता है। उनका आरोप है कि तकनीकी खराबी की समस्या लगातार बनी हुई है लेकिन संबंधित अधिकारी इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं।
किसानों ने कृषि एवं सहकारिता विभाग से मांग की है कि ई-पॉस मशीनों की नेटवर्क समस्या का जल्द समाधान कराया जाए। साथ ही सर्वर फेल होने की स्थिति में ऑफलाइन या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसानों को खाद के लिए बार-बार परेशान न होना पड़े। फिलहाल सहकारी समितियों पर रोजाना सुबह से किसानों की भीड़ जुट रही है। सर्वर के भरोसे चल रही वितरण व्यवस्था किसानों की नाराजगी का कारण बनती जा रही है।






