लखनऊ, 8 जून 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और तीन छात्रों के निष्कासन के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक जनसमर्थन हासिल करता नजर आ रहा है। आंदोलन के सातवें दिन सोमवार को भी विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का धरना जारी रहा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अडिग रहने का संदेश दिया।
आंदोलन को लगातार मिल रहे समर्थन के बीच सोमवार को सपा विधायक एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रनेता रविदास मेहरोत्रा भी धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और खुले तौर पर उनके समर्थन में खड़े दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने धरनास्थल से ही विश्वविद्यालय के कुलपति को फोन कर छात्रों का निष्कासन वापस लेने की अपील की।
विधायक ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उनके पहुंचने से आंदोलनरत छात्रों का उत्साह भी बढ़ा और धरनास्थल पर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी तेज हो गई।

धरने पर बैठे छात्रों का आरोप है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई कर रहा है जबकि दूसरी ओर फीस में कई गुना वृद्धि कर छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। छात्रों का कहना है कि निष्कासित छात्रों की वापसी, फीस वृद्धि पर पुनर्विचार और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता रमेश श्रीवास्तव समेत कई पूर्व छात्र नेताओं ने भी आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर समर्थन जताया था। विभिन्न छात्र संगठनों और महाविद्यालयों के छात्रों के जुड़ने से आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में छात्रों और प्रशासन के बीच जारी गतिरोध पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आंदोलन के बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक समर्थन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव जरूर बढ़ा दिया है।






