मायावती का सियासी दलों पर निशाना : ‘विषैली राजनीति’ पर जताई चिंता, गरीबी-बेरोजगारी पर ध्यान देने की नसीहत
UP Election 2027 : बसपा प्रमुख ने नेताओं की अमर्यादित बयानबाजी और बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप पर उठाए सवाल, कहा- इससे राजनीतिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होगा
लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2027 की आहट के बीच प्रदेश में तेज होते सियासी हमलों को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने चिंता जताई है। उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष और कटुता का स्तर लगातार गिर रहा है। अब आरोप-प्रत्यारोप व्यक्तिगत स्तर तक पहुंचकर अमर्यादित और अपमानजनक होते जा रहे हैं। उन्होंने हिंसक बयानबाजी तक पहुंच रही इस राजनीति को देश की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बीच भी नेताओं को एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों को ऐसी आपत्तिजनक और विषैली राजनीति को किसी भी तरह बढ़ावा नहीं देना चाहिए। उनके मुताबिक संकीर्ण और गरीब-विरोधी स्वार्थों से प्रेरित राजनीति का बढ़ता चलन जनता के राजनीतिक व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर कर सकता है।
भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया पर उठते सवालों का भी किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने सरकारी स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता पहले से ही बेचैनी का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में नेताओं के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई हालात को और जटिल बना रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच बढ़ती अशोभनीय टिप्पणियां और बयानबाजी देश के राजनीतिक माहौल को और कड़वा बना सकती हैं। ऐसी प्रवृत्ति को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई पर ध्यान देने की अपील
मायावती ने कहा कि जनता चाहती है कि राजनीतिक दल देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी ज्वलंत समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। इसके बजाय नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और विवादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा जनहित के मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से अपील की कि वे अपनी बयानबाजी पर संयम रखें और देश व जनता के हितों को प्राथमिकता दें।
1. भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष, कटूता, आरोप-प्रत्यारोप आदि का स्तर, गिरते-गिरते अब व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित, अपमानजनक, संकीर्ण व जातिवाद से ग्रसित होता हुआ, हिंसक बयानबाजी़ तक भी पहुँच जाना अति-दुखद तथा देश की गरिमा व मान-मर्यादा आदि के लिये भी अति-चिन्तनीय।
2. इतना ही नहीं बल्कि इससे बढ़कर शीर्ष स्तर पर भी आसीन लोगों के लिये एक-दूसरे के लिये अगर समुचित सम्मान नहीं तो आपत्तिजनक एवं विषैली राजनीति को अवश्य ही किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये, वरना ख़ासकर बढ़ती संकीर्ण व ग़रीब-विरोधी स्वार्थी राजनीति के प्रचलन के कारण लोगों का भरोसा यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर कमज़ोर होना कतई भी देश व जनहित में नहीं होगा।
3. वैसे भी सरकारी स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार व चुनावी प्रक्रिया पर भी ऊंगली उठने के कारण जनता में पहले से ही काफी बेचैनी है और ऐसे में नेताओं के बीच आपस में नाक की लड़ाई स्थिति को और भी अधिक विषम बना रही है, जबकि जनता की चाहत देश की बढ़ती ग़रीबी, बेरोज़गारी व महंगाई आदि जैसी ज्वलन्त समस्याओं के निदान पर सभी का ध्यान केन्द्रित करने की है।
4. ऐसे में ख़ासकर सभी पार्टियों व उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी का बढ़ता हुआ होड़ यहाँ राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा व विषैला बनायेगा, जो अनुचित। सभी लोग इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर।— Mayawati (@Mayawati) October 27, 2026






