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क्लासरूम से अंतरिक्ष तक… शुभांशु शुक्ला का बच्चों को मंत्र- ख्वाब देखो, ठान लो तो कोई सपना असंभव नहीं!

लखनऊ में ‘द सेकंड ऑर्बिट’ के विमोचन पर यूनिवर्सल बुक सेलर में एस्ट्रोनॉट ने छात्रों से साझा किया अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव, बोले- सफलता के साथ विफलता भी सफर का हिस्सा, AI से डरने के बजाय सीखें उसका बेहतर इस्तेमाल

लखनऊ, 16 सितंबर 2026:

कभी क्लासरूम में बैठकर अंतरिक्ष का सपना देखने वाला एक बच्चा बुधवार को लखनऊ में बच्चों के सामने था। सामने बैठे छात्रों को अपनी कहानी सुनाते हुए एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने कहा कि जिंदगी में सपने जरूर देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। अगर इंसान ठान ले तो अपने हर ख्वाब पूरे कर सकता है।

शुभांशु शुक्ला बुधवार को शहर के प्रतिष्ठित यूनिवर्सल बुक सेलर में अपनी किताब ‘द सेकंड ऑर्बिट’ के विमोचन के लिए पहुंचे थे। किताब लॉन्च के बाद उन्होंने करीब एक घंटे तक छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा किए और बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए।

उन्होंने कहा कि आज बच्चे जहां खड़े हैं, कभी वह भी वहीं खड़े थे। कहानी कहीं से भी शुरू हो सकती है। किसी मेले से, क्लासरूम से या उस क्षण से जब किसी के विचारों में हलचल पैदा होती है। उनकी कहानी भी तब शुरू हुई, जब पहली बार उन्होंने अंतरिक्ष के बारे में सुना और उसके बारे में जानकारी हासिल करनी शुरू की। शुभांशु ने कहा कि बचपन में क्लासरूम में देखा ख्वाब कब अंतरिक्ष तक पहुंच गया, पता ही नहीं चला। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे ख्वाब देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा दें।

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‘द सेकंड ऑर्बिट’ में सफलता ही नहीं, विफलता की कहानी भी

अपनी किताब को छात्रों के लिए खास बताते हुए शुभांशु ने कहा कि इसमें क्लासरूम से अंतरिक्ष तक के सफर और उससे जुड़े अनुभवों को साझा किया गया है। किताब में सफलता के साथ विफलता भी है और यह भी बताया गया है कि किसी काम के लिए खुद को मानसिक रूप से कैसे तैयार किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि बच्चे इसे ज्यादा से ज्यादा पढ़ेंगे और उन्हें यह संदेश मिलेगा कि कई ऐसी चीजें भी संभव हैं जिन्हें वे फिलहाल मुश्किल मानते हैं। उन्होंने किताबों की अहमियत बताते हुए कहा कि किसी चीज को देखना अलग अनुभव है लेकिन किताब पढ़ने पर हमारे मन का इमेजिनेशन एक्टिव हो जाता है।
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AI पर बोले- डरिए नहीं, बेहतर इस्तेमाल सीखिए

AI को लेकर पूछे गए सवाल पर शुभांशु ने कहा कि AI भविष्य की टेक्नोलॉजी है। इसे बुरा घोषित करने के बजाय इससे सीखना चाहिए और इसका बेहतर इस्तेमाल समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का दुरुपयोग करने के बजाय अच्छे काम के लिए इस्तेमाल जरूरी है।

नौकरियों पर उन्होंने कहा कि इतिहास में जब भी नई टेक्नोलॉजी आई, पुराने तरीकों की कुछ नौकरियां खत्म हुईं.लेकिन नए तरह की नौकरियां भी पैदा हुईं। AI के साथ भी नई तरह के रोजगार के अवसर सामने आएंगे। जरूरत इस बात की है कि AI का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए। कार्यक्रम के दौरान शुभांशु की पत्नी कामना शुक्ला, यूनिवर्सल बुक सेलर के चंद्र प्रकाश, गौरव प्रकाश, पुस्तक प्रेमी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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