Sitapur City

गमछा बांध, झोला लेकर तहसील पहुंची एंटी करप्शन टीम…पेशकार व निजी कर्मचारी को रिश्वत लेते दबोचा

दाखिल-खारिज के नाम पर पहले 20 हजार रुपये मांगे गए थे, बाद में 18 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। एंटी करप्शन टीम ने तहसील परिसर में डटी रही, रुपये लेते ही दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया, तहसील में बतौर सहायक काम कर रहे हैं निजी कर्मचारी

सीतापुर, 20 मई 2026:

मिश्रिख तहसील में एंटी करप्शन टीम ने पेशकार और उसके निजी कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर दाखिल-खारिज कराने के नाम पर 18 हजार रुपये लेने का आरोप है। टीम दोनों को पकड़कर सीधे अपने साथ ले गई।

न्यायिक तहसीलदार अतुल सेन सिंह के कार्यालय में नाजिर पद पर तैनात अनीस अहमद के पास पेशकार का अतिरिक्त प्रभार भी था। उनके साथ लंबे समय से रोहित सिंह नाम का निजी कर्मचारी काम कर रहा था। आरोप है कि विमल नाम के एक युवक ने दाखिल-खारिज के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। मामला आगे बढ़ाने के बदले उससे रिश्वत मांगी गई। पीड़ित का कहना है कि शुरुआत में 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में 18 हजार रुपये में बात तय हुई। इसके बाद उसने एंटी करप्शन संगठन से शिकायत कर दी। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने जाल बिछाया।

मंगलवार सुबह तहसील खुलने से पहले ही एंटी करप्शन टीम के सदस्य सादे कपड़ों में परिसर में पहुंच गए। कोई सिर पर गमछा बांधे था तो कोई झोला लेकर आम लोगों की तरह घूमता रहा। टीम ने शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट दिए और तय योजना के मुताबिक उसे रोहित सिंह के पास भेजा। जैसे ही रोहित ने रुपये हाथ में लिए, टीम ने उसे दबोच लिया। जांच के दौरान रोहित ने बताया कि वह रकम अनीस अहमद के कहने पर ले रहा था। इसके बाद टीम ने अनीस अहमद को भी उनके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया।

कार्रवाई के दौरान एक अन्य निजी कर्मचारी के भी मौके से भाग जाने की चर्चा रही। दोनों आरोपियों को एंटी करप्शन टीम संदना थाने ले गई, जहां उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। तहसील परिसर में इस कार्रवाई के बाद निजी कर्मचारियों की भूमिका फिर चर्चा में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की लगभग हर तहसील में लेखपाल, कानूनगो और पेशकारों के साथ निजी कर्मचारी काम करते हैं। लेनदेन से जुड़े मामलों में अक्सर इन्हीं के जरिए काम कराया जाता है।

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