UP News : किसान परिवारों के मेधावी बच्चों को बड़ा तोहफा, छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी, अब सालाना मिलेंगे 60 हजार
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ा, सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820 हुईं, हर विद्यार्थी को सालाना 24 हजार रुपये अतिरिक्त मदद, नौ वर्षों में 6,454 विद्यार्थियों को मिल चुकी 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति

लखनऊ, 18 अक्टूबर 2026:
यूपी में किसान परिवारों के मेधावी बच्चों के लिए उच्च कृषि शिक्षा की राह अब और आसान होगी। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाते हुए छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी कर दी हैं। अब योजना के तहत अधिक विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इसके साथ ही छात्रवृत्ति की मासिक राशि भी तीन हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई है। यानी पात्र विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार रुपये के बजाय 60 हजार रुपये मिलेंगे। इस तरह प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 24 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता प्राप्त होगी।
सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820, दोगुने विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से संचालित इस योजना के तहत हर कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में छात्रवृत्ति की निर्धारित संख्या 45 से बढ़ाकर 90 कर दी गई है। वहीं, हर कृषि महाविद्यालय में सीटें 15 से बढ़ाकर 30 की गई हैं। इस बदलाव के बाद छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के अधिक प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा।
कृषि से लेकर पशुपालन तक की पढ़ाई में मिलेगी मदद
योजना का लाभ कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है। संशोधित व्यवस्था में कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक की छात्रवृत्ति सीटें 25 से बढ़ाकर 50, गृह विज्ञान स्नातक की छह से 12, कृषि स्नातकोत्तर की 10 से 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर की चार से आठ कर दी गई हैं। कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर की सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और स्नातकोत्तर स्तर की पांच से बढ़ाकर 10 की गई हैं।
नौ वर्षों में 6,454 विद्यार्थियों को 22.90 करोड़ रुपये की मदद
योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। सीटों और छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि से अब अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद मिलेगी और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा।

मेरिट और निर्धारित अंकों के आधार पर होगा चयन
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी किसानों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित पात्र विद्यार्थियों को मिलता है। स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। चयन पात्रता और मेरिट के आधार पर किया जाता है।
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। छात्रवृत्ति का विस्तार युवाओं को कृषि क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने, नवाचार अपनाने और भविष्य में कृषि आधारित उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।






