
लखनऊ, 21 सितंबर 2026:
UP Assembly Elections नजदीक आने के साथ सियासी जंग पोस्टरों तक पहुंच गई है। सोमवार को लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए विवादित पोस्टर और होर्डिंग सामने आए। इन पोस्टरों में पूर्व सीएम अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों पर तीखे नारे लिखे गए हैं… ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार।’
पोस्टर वार का दायरा केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई जिलों में ऐसे पोस्टर लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का जुमला इस्तेमाल करते हुए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों अवध, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के नामों के साथ कई चर्चित चेहरों को जोड़ा गया है।

इन पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा पूर्वांचल से उमाकांत यादव, रमाकांत यादव और मुन्ना बजरंगी तथा पश्चिमी यूपी से याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा और मुकीम काला जैसे नामों का भी उल्लेख किया गया है। पोस्टरों के जरिए सपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था और कथित अपराधी प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। हालांकि, इनमें लगाए गए आरोप पोस्टर लगाने वालों के दावे हैं।
गोंडा में लखनऊ हाईवे पर लगाए गए एक होर्डिंग में अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें तथा उनसे जुड़ी खबरों की कटिंग भी लगाई गई। पोस्टर सामने आने के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कई जगह इन्हें फाड़ दिया। गोंडा में सपा नेताओं ने पोस्टर हटाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये पोस्टर किसने लगवाए? फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी राजनीतिक दल या संगठन की ओर से इन पोस्टरों की जिम्मेदारी लेने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पोस्टरों के आधार पर किसी दल या संगठन को सीधे जिम्मेदार ठहराना अभी संभव नहीं है। चुनावी माहौल के बीच सामने आए इस पोस्टर वार ने यूपी की सियासत में एक नया मुद्दा जरूर गर्म कर दिया है।






