
लखनऊ, 23 सितंबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिए केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन और वोट जोड़ने-काटने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं। इससे देश में लोकतंत्र के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
संजय सिंह ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार औपचारिक तौर पर असहमति दर्ज कराई है। उनके मुताबिक फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और मतदाताओं के नाम जोड़ने-काटने की केंद्रीकृत व्यवस्था को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। 23 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने भी इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
‘स्थानीय अधिकारियों के अधिकार छीने जा रहे’
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत करने से स्थानीय स्तर के अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग के भीतर ही दो आयुक्त किसी फैसले पर असहमति दर्ज करा रहे हैं तो फिर एकतरफा तरीके से निर्णय क्यों लिए जा रहे हैं।
संजय सिंह ने दावा किया कि किसी विधानसभा क्षेत्र में हजारों वोट हटाए जाने का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
‘आडवाणी से लेकर केजरीवाल तक के नाम हटे’
संजय सिंह ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर दिल्ली और पश्चिम बंगाल के उदाहरण भी दिए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व सेना प्रमुख, पूर्व विदेश मंत्री, पूर्व विदेश सचिव, अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों सहित कई प्रमुख लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हुए।
देश भर का चुनाव लूटने के अपराध में ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए।
दिल्ली हरियाणा महाराष्ट्र बिहार बंगाल के सारे चुनाव बेईमानी से जीते गये ये सभी चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द किये जाय।
मोदी ने “लोकप्रियता” नहीं “लूटप्रियता” से चुनाव जीता है।#चुनावी_लुटेरा_ज्ञानेश https://t.co/ZVHeL8cJYX— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) September 23, 2026
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और लाखों नाम लंबित रखे गए। संजय सिंह ने सवाल किया कि यदि बाद में बड़ी संख्या में नाम सही पाए गए तो उन मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की जिम्मेदारी किसकी होगी। दिल्ली में निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू का नाम भी नोटिस वाली सूची में होने की रिपोर्ट सामने आई है।
गिरफ्तारी और पुराने चुनाव रद्द करने की मांग
संजय सिंह ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग तक कर दी। उन्होंने कहा कि उनके पद पर रहते हुए निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। AAP सांसद ने बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत उन राज्यों के चुनावों को रद्द करने की मांग की, जहां कथित तौर पर मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने निष्पक्ष मतदाता सूची तैयार कर दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी।
दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर भी केंद्र को घेरा
संजय सिंह ने दिल्ली के कालकाजी में सामने आए गैंगरेप के मामले को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अधीन है, इसके बावजूद महिलाओं, छात्राओं, वकीलों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपराध की घटनाओं और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा।
बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयान का हवाला दिया और उनके इस्तीफे की मांग की। संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक अपना विरोध जारी रखेगी। इस पूरे विवाद ने चुनावी माहौल गरमाने के साथ चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।






