
लखनऊ, 8 सितंबर 2026:
यूपी में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने अब कार्रवाई का फोकस हादसा होने के बाद की पुलिसिंग से हटाकर हादसा होने से पहले उसकी वजह खत्म करने पर कर दिया है। योगी सरकार के जीरो फैटैलिटी के विजन के तहत चल रही जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।

गत जनवरी से अगस्त के बीच जेडएफडी के दायरे वाले स्थानों पर पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत, मृतकों में 8.03 प्रतिशत और घायलों में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और 1,107 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली। यानी जेडएफडी वाले स्थानों पर औसतन हर दिन करीब 7 हादसे कम हुए और करीब 5 जिंदगियां बचीं।
हादसे के पीछे की वजह खोजेगी ‘क्रिटिकल कॉरिडोर टीम’
लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में जेडएफडी योजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों और नोडल अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला में सड़क हादसों की रोकथाम की रणनीति पर मंथन हुआ। इसमें 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी शामिल हुए।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को महज संयोग मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। हर हादसे के पीछे कोई न कोई कारण होता है। उस मूल कारण की पहचान कर उसे दूर करना जरूरी है। उन्होंने टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में दुर्घटना संभावित स्थानों और वहां हादसों की वजहों की वैज्ञानिक पहचान कर मिशन मोड में रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के क्रम में संचालित Zero Fatality District कार्यक्रम के तृतीय एवं चतुर्थ चरण के अंतर्गत 59 जनपदों के 213 दुर्घटना-बहुल स्थलों पर गठित 228 Critical Corridor Teams की कार्यशाला को आज पुलिस मुख्यालय में संबोधित किया।
टीमों को… pic.twitter.com/shXRnwHt5n
— DGP UP (@dgpup) September 7, 2026
हादसे के बाद FIR नहीं, पहले रोकथाम पर फोकस
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की जिम्मेदारी केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं है। हर हादसे के बाद यह भी जांचना होगा कि सड़क, यातायात व्यवस्था, प्रवर्तन या किसी अन्य कमी के कारण दुर्घटना हुई और उसे दोबारा रोकने के लिए क्या बदला जाना चाहिए।
संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय, कमियों का फॉलोअप और जरूरी सड़क सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

ब्लैक स्पॉट से लेकर CPR तक, टीमों को मिलेगा विशेषज्ञ प्रशिक्षण
कार्यशाला में सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट, प्रथम उपचार और CPR समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। लक्ष्य साफ है कि जहां हादसे ज्यादा, वहां कार्रवाई भी ज्यादा। जेडएफडी योजना के तहत वैज्ञानिक विश्लेषण से दुर्घटना बाहुल्य स्थानों की पहचान कर वहां लक्षित प्रवर्तन, सड़क अभियांत्रिकी की खामियों को दूर करने, सुरक्षा उपाय बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। यानी यूपी में सड़क हादसों के खिलाफ रणनीति अब सिर्फ ‘हादसा हुआ तो कार्रवाई’ तक सीमित नहीं रहेगी। सवाल यह होगा कि हादसा हुआ ही क्यों और अगला हादसा कैसे रोका जाए?






