
लखनऊ, 24 सितंबर 2026:
यूपी में ट्रैफिक चालान को लेकर वाहन चालकों के लिए व्यवस्था बदलने जा रही है। अब सड़क पर यातायात नियम तोड़ने पर चालान तो कटेगा लेकिन गलत या फर्जी चालान के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वाहन चालकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई व्यवस्था में घर बैठे ऑनलाइन चालान को चुनौती दी जा सकेगी। खास बात यह है कि चुनौती मिलने के बाद शिकायत निस्तारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer-GRO) को 30 दिन के भीतर जवाब देना होगा। तय समय में जवाब नहीं आया तो चालान स्वत: निरस्त माना जाएगा।
यूपी में पुरानी ई-चालान व्यवस्था पर बुधवार रात से रोक लगा दी गई है। अब पुरानी प्रणाली से कोई नया चालान नहीं काटा जाएगा। जल्द ही नए चालान Next-Gen e-Challan 2.0 एप के जरिए किए जाएंगे। प्रदेश के यातायात निदेशालय ने सभी जिलों को नई व्यवस्था लागू करने के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
पुराने चालानों का डेटा नई व्यवस्था में ट्रांसफर
नई प्रणाली लागू करने से पहले पुराने ई-चालानों का डेटा और जरूरी अभिलेख ट्रांसफर किए जा रहे हैं। कोर्ट और लोक अदालत से संबंधित रसीदों तथा निस्तारित मामलों का पूरा ब्योरा भी नई व्यवस्था में दर्ज किया जा रहा है। इसके लिए बुधवार रात 12 बजे तक का समय तय किया गया था।
इसका मकसद यह है कि सिस्टम बदलने के दौरान पहले से दर्ज चालानों के भुगतान या निस्तारण में वाहन चालकों को तकनीकी परेशानी न हो। यानी पुराने चालान सिर्फ व्यवस्था बदलने से गायब नहीं होंगे अपितु उनका रिकॉर्ड नई प्रणाली में सुरक्षित रहेगा।
गलत चालान पर 45 दिन में ऑनलाइन आपत्ति
नई व्यवस्था में वाहन चालकों को गलत चालान के खिलाफ स्पष्ट समयसीमा के साथ ऑनलाइन शिकायत का विकल्प मिलेगा। चालान जारी होने की तारीख से 45 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज करानी होगी। इसके बाद GRO को उस चुनौती पर 30 दिन के भीतर फैसला या जवाब देना होगा।
30 दिन तक जवाब नहीं आया तो चालान निरस्त
नई व्यवस्था का सबसे अहम प्रावधान यही है। यदि वाहन चालक ने चालान को चुनौती दी और GRO ने 30 दिन के भीतर कोई जवाब नहीं दिया तो वह चालान स्वत: निरस्त माना जाएगा। अगर जांच के बाद चालान सही ठहराया जाता है तो संबंधित वाहन चालक को भुगतान के लिए 120 दिन का समय मिलेगा। इस अवधि में वाहन चालक चाहे तो आधी फीस जमा कर कोर्ट का रुख भी कर सकता है।
इस तरह नई ई-चालान प्रणाली में चालान जारी करने के साथ-साथ उसे चुनौती देने, शिकायत के निस्तारण और आगे कोर्ट जाने के लिए भी स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। इसका सीधा असर उन वाहन चालकों पर पड़ेगा जिन्हें गलत चालान के निस्तारण के लिए अब तक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।






