Uttarakhand

धामी ने की भगवान धन्वन्तरि की पूजा, मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक आयुर्वेद को पहुंचाने का लिया संकल्प

आयुर्वेद दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन, सीएम बोले- आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा, मदन कौशिक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखंड में आयोजित समारोह में हुए शामिल

राजकिशोर तिवारी

देहरादून/हरिद्वार, 23 सितंबर 2026ः

उत्तराखंड में आयुर्वेद दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में भगवान धन्वन्तरि की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। वहीं, सीएम हरिद्वार के औरंगाबाद में पतंजलि वेलनेस योगग्राम में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के उद्घाटन समारोह में भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा को आधुनिक शिक्षा और विज्ञान से जोड़ना समय की मांग है। इसके अलावा आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखंड में आयोजित समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और विभिन्न रोगों से बचाव में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के बीच आयुर्वेद की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। इसके माध्यम से स्वस्थ जीवन के साथ-साथ प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराओं और उनके वैज्ञानिक महत्व को नए दृष्टिकोण से देख रही है। धामी ने आयुर्वेद दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने व आयुर्वेद की उपयोगी परंपराओं को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

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वहीं, पतंजलि वेलनेस योगग्राम में सीएम ने कहा कि गुरुकुल केवल पुस्तकीय ज्ञान देने की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि यहां विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराया जाता था। उन्होंने विश्वास जताया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् इसी परंपरा को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि गुरुकुलम् में आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कौशल, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया है। उत्तराखंड में भी इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
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उधर समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने आयुर्वेद को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय आयुर्वेद के विकास के लिए अनुकूल है और देश के विभिन्न राज्य इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र में ‘आयुर्वेद शिक्षा बोर्ड’ की स्थापना के साथ एकीकृत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है।

समारोह में आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। डॉ. अनुप गक्खड़ ने ‘जीवनशैली जनित विकारों में आयुर्वेद’, डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने ‘रिसर्च एंड इनोवेशन इन आयुर्वेद’, वैद्य हर्ष सहगल ने ‘प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी इन आयुर्वेद’, डॉ. जेएन नौटियाल ने ‘आयुर्वेद में पंचकर्म का महत्व’ और डॉ. राजीव कुरेले ने ‘धन्वंतरी पूजन-आयुर्वेद की शाश्वत परंपरा’विषय पर विचार रखे। इस अवसर पर आयुष एवं आयुष शिक्षा की सचिव रंजना राजगुरु, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखंड के निदेशक डॉ. आरपी सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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