Uttarakhand

Insta पर उत्तराखंड पुलिस का फेक अकाउंट, वर्दी में वीडियो, AI-Deepfake के खेल ने भेजवाया जेल

उत्तराखंड पुलिस की पहचान का इस्तेमाल कर बना डाली फर्जी डिजिटल छवि, वरिष्ठ अधिकारी के नाम से तैयार किए भ्रामक वीडियो; मोबाइल, नकली आईडी कार्ड और वर्दी जैसी सामग्री बरामद

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 25 जून 2026:

सोशल मीडिया पर खुद को उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बताकर लोगों को गुमराह करने वाले एक युवक को साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर पुलिस की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में सामने आया कि उसने AI और Deepfake तकनीक की मदद से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नाम पर भ्रामक वीडियो भी तैयार किए थे।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से इंस्टा पर Uttarakhand _ police __112 नाम से एक अकाउंट चलाया जा रहा था। इस अकाउंट के जरिए उत्तराखंड पुलिस की छवि का इस्तेमाल कर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने मेटा समेत विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से जरूरी जानकारी जुटाई। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान की गई। इसके बाद 24 जून को क्लेमेन्टाउन इलाके में दबिश देकर लुकमान मलिक नामक 20 साल के युवक को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने Uttarakhand_police__112 नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। उसने उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल कर AI और Deepfake तकनीक से वीडियो तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी वर्दी पहनकर फोटो और वीडियो भी बनाता था ताकि लोगों पर प्रभाव डाल सके और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल कर आर्थिक फायदा कमा सके। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट लॉग-इन पोजीशन में मिला। मोबाइल से AI जनरेटेड वीडियो, पुलिस वर्दी में खींची गई तस्वीरें और फर्जी पुलिस पहचान पत्र की फोटो भी बरामद हुईं। घर की तलाशी के दौरान पुलिस को उत्तराखंड पुलिस की वर्दी जैसी पोशाक और उससे जुड़ी अन्य सामग्री भी मिली।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ लोक सेवक का प्रतिरूपण करने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने और AI तकनीक का दुरुपयोग कर भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। बरामद सामग्री को सीज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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