उत्तराखंड: सुखवन्त सिंह आत्महत्या केस में बड़ा एक्शन… अब SIT करेगी पूरे मामले की पड़ताल, निष्पक्ष जांच के दिए गए निर्देश
सुखवन्त सिंह आत्महत्या मामले में पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए IG STF की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय SIT का गठन किया है। निष्पक्ष जांच के लिए 12 पुलिसकर्मियों को स्थानान्तरित किया गया है
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 16 जनवरी 2026:
जनपद ऊधमसिंहनगर के ग्राम पैगा निवासी सुखवन्त सिंह द्वारा 10 और 11 जनवरी की दरमियानी रात काठगोदाम (हल्द्वानी) में आत्महत्या किए जाने के मामले में पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
IG STF की अध्यक्षता में बनी पांच सदस्यीय SIT
मामले की निष्पक्ष और गहन विवेचना के लिए पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है। SIT में पुलिस अधीक्षक चम्पावत अजय गणपति, क्षेत्राधिकारी टनकपुर वन्दना वर्मा, निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट और उपनिरीक्षक मनीष खत्री को शामिल किया गया है। यह टीम पूरे मामले की विस्तार से जांच करेगी।

12 पुलिसकर्मी तत्काल स्थानान्तरित
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रकरण से जुड़े निलम्बित तीन उपनिरीक्षक, एक अपर उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और सात आरक्षियों सहित कुल 12 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से गढ़वाल रेंज के जनपद चमोली और रुद्रप्रयाग स्थानान्तरित कर दिया गया है।
वीडियो और ई मेल शिकायत की भी जांच
पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और मृतक द्वारा ई मेल के माध्यम से की गई शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। इन शिकायतों में स्थानीय व्यक्तियों और जनपद ऊधमसिंहनगर पुलिस के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि तथ्यों की जांच के बाद नियमों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या था पूरा मामला?
10 और 11 जनवरी की दरमियानी रात को हल्द्वानी के काठगोदाम इलाके में एक होटल में काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें कई पुलिस अधिकारियों और कुछ कथित प्रॉपर्टी डीलरों पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में सुखवंत सिंह ने कहा कि जमीन के एक मामले में उनके साथ धोखाधड़ी हुई, जिसमें लगभग चार करोड़ रुपये की ठगी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की, तो न्याय दिलाने के बजाय पुलिस ने आरोपियों का पक्ष लिया।






