
लखनऊ/वाराणसी, 30 जुलाई 2026:
वाराणसी मंडल की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में यूपी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार का लक्ष्य धार्मिक पर्यटन को नई गति देने के साथ स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है। इसके मद्देनजर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृतअभिजात ने गुरुवार को वाराणसी में मंडल की प्रस्तावित और निर्माणाधीन पर्यटन, संस्कृति तथा धर्मार्थ परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की।
इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 109.20 करोड़ रुपये की लागत वाली 36 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया। समीक्षा में सामने आया कि प्रस्तावित 36 परियोजनाओं में वाराणसी की सर्वाधिक 22, जौनपुर की 6, गाजीपुर की 5 और चंदौली की 3 परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए मंदिरों, घाटों और ऐतिहासिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, आधारभूत पर्यटन सुविधाओं का विस्तार तथा श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
काशी के इन धार्मिक स्थलों का होगा विकास
वाराणसी की प्रमुख योजनाओं में कैंट क्षेत्र के सती माई मंदिर, प्राचीन रामबाग मंदिर, रोहनिया के प्राचीन शिवधाम मंदिर, पिंडरा स्थित पौहारी बाबा मंदिर, निर्माण दास बाबा कुटी और भगवान राम-जानकी महावीर मंदिर का विकास प्रमुख है। इसके अलावा शिवपुर स्थित सराय मोहनाघाट पर करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी घाट का निर्माण, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से एक हजार क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण तथा ‘परंपरा केंद्र’ के विकास जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर दिशा-सूचक एवं जानकारी पट्टिका (साइनेज) लगाने का प्रस्ताव भी बैठक में शामिल रहा।
गाजीपुर, चंदौली व जौनपुर के धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष जोर
बैठक में गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर के धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। गाजीपुर में बूढ़े महादेव मंदिर, हनुमान चौतरा और हथियाराम मठ, चंदौली में विश्वकर्मा मंदिर, दुखहरण महादेव बाबा मंदिर और काली माता मंदिर, जबकि जौनपुर में गोमतेश्वर महादेव धाम, मां वैष्णो देवी धाम और राधा-कृष्ण मंदिर सहित छह प्रमुख धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई।

रोहनिया में 24.63 करोड़ की लागत से बनेगा संत रविदास संग्रहालय
संस्कृति विभाग की ओर से वाराणसी के बत्तीस खंभा, बकरियाकुंड, गुरुधाम मंदिर और पंचो शिवाला के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। वहीं निर्माणाधीन योजनाओं में गाजीपुर के शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक के विकास, रोहनिया में लगभग 24.63 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले संत रविदास संग्रहालय तथा 5.21 करोड़ रुपये की लागत वाले मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय परियोजना फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में है।
धर्मार्थ कार्य विभाग ने जौनपुर के बड़े हनुमान मंदिर के विकास, वाराणसी के भिंगराज अनाथालय परिसर में लगभग 24.04 करोड़ रुपये की लागत से नए अनाथालय और दंडी सेवाश्रम परिसर में 23.41 करोड़ रुपये की लागत से सेवाश्रम विकसित करने के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इसके साथ ही पिंडरा क्षेत्र की करखियां झील को करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना भी समीक्षा का प्रमुख विषय रही। इससे प्रकृति आधारित पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
बैठक में मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं में स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और विरासत को प्राथमिकता दी जाए तथा एक करोड़ रुपये तक की सभी स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाएं नवंबर तक हर हाल में पूरी की जाएं। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा कर प्रदेश को विरासत आधारित और सतत पर्यटन का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।






