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होर्मुज पर ‘समुद्री जंग’! ईरान ने फिर बंद किया, अमेरिका पर वादाखिलाफी व समुद्री डकैती का आरोप

सीजफायर के बीच खुला था रास्ता, कुछ ही घंटों में फिर सैन्य नियंत्रण, ट्रंप बोले- समझौते तक नाकेबंदी जारी, यूरेनियम हर हाल में हासिल करेंगे

न्यूज डेस्क, 18 अप्रैल 2026:

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका पर वादाखिलाफी और ‘समुद्री डकैती’ का आरोप लगाते हुए रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को शनिवार को फिर से बंद कर दिया। इस फैसले के साथ ही यह अहम समुद्री मार्ग दोबारा सख्त सैन्य नियंत्रण में चला गया है।

ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ बातचीत के बाद भरोसे में आकर शुक्रवार को इस रास्ते को खोला था। तेल व मालवाहक जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी लेकिन अमेरिकी कार्रवाई में कोई नरमी नहीं आई। तेहरान के मुताबिक अमेरिका ने नाकेबंदी के नाम पर जहाजों के साथ सख्ती जारी रखी जो सीजफायर समझौते का उल्लंघन है।

इसी के जवाब में ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह उसकी सेना के नियंत्रण में रहेगी। ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी नहीं हटती तब तक किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जाएगा। दूसरी ओर, अमेरिका ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान कोई ठोस समझौता नहीं करता, तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी।उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका हर हाल में ईरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम हासिल करेगा और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

ईरानी सरकारी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका की नाकेबंदी ‘समुद्री लूट’ के बराबर है। आईआरजीसी के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट अब अपनी पुरानी स्थिति में लौटेगा और इस पूरे क्षेत्र पर सशस्त्र बलों का नियंत्रण रहेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने युद्धविराम की अवधि के लिए इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने की घोषणा की थी। यहां तक कि ट्रंप ने भी एक पोस्ट में ईरान को धन्यवाद दिया था लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी। इस ताजा घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ा दी है क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

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