लखनऊ, 25 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन शनिवार को दूसरे दिन भी तेज रहा। नौकरी की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए अभ्यर्थी बसपा प्रमुख एवं पूर्व सीएम मायावती के आवास पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ महिला अभ्यर्थी सड़क पर बैठ गईं और पुलिस के समझाने के बावजूद हटने को तैयार नहीं हुई। करीब 15 मिनट तक चली नोकझोंक के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उनके साथ न्याय करने के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचाने वाला हलफनामा दाखिल किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने 8270 सीटों का एफिडेविट दाखिल किया है, जिसमें 4946 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं जो इस भर्ती प्रक्रिया से तीन बार बाहर हो चुके हैं। उनका कहना है कि इससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी मूल मांग 6800 सीटों पर पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की थी लेकिन सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार केवल करीब 3300 अभ्यर्थियों को ही लाभ मिल पाएगा। उनका आरोप है कि शुरुआत से ही आरक्षण प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। इसी वजह से वर्षों से उन्हें न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि हाईकोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया था और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उनका कहना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग और मुख्यमंत्री भी 6800 सीटों पर गड़बड़ी स्वीकार कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकार सुप्रीम कोर्ट में 8200 सीटों का मामला लेकर गई जबकि केवल 6800 सीटों के आरक्षण विवाद पर ही सुनवाई होनी चाहिए थी।

अभ्यर्थियों ने सरकार से यह भी मांग की कि वह स्पष्ट करे कि इन सीटों में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए कितनी सीटें निर्धारित हैं। उनका आरोप है कि पहली, दूसरी और तीसरी काउंसलिंग में शामिल नहीं होने या जॉइनिंग नहीं लेने वाले अभ्यर्थियों के पद भी सुरक्षित रखे जा रहे हैं जबकि ऐसे पदों को रिक्त मानकर मेरिट सूची के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि सरकार 4946 विवादित पदों को हटाकर 6800 सीटों पर नियुक्ति सुनिश्चित करे। जब तक यह मांग पूरी नहीं होगी तब तक राजधानी में उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।






