
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 10 अगस्त 2026ः
इस बार उत्तराखंड में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत ‘वोकल फॉर लोकल’ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा रहा है। इस अभियान से ग्रामीण महिलाओं का हुनर सामने आएगा और उनको आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। सहसपुर ब्लॉक के शंकरपुर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे हाथ से बने सूती कपड़े के तिरंगे स्वतंत्रता दिवस पर घरों की शान बढ़ाएंगे। महिलाएं छोटे-बड़े कई आकार के झंडे तैयार कर रही हैं। स्कूलों, सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक संगठनों से महिलाओं को ऑर्डर मिल रहे हैं।
सीएम पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विजन को ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर से आगे बढ़ा रही हैं। रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से संचालित सिलाई यूनिट में अब तक पांच हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा चुके हैं। आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दौरान इनकी मांग सबसे अधिक रहती है।
रोजगार के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
शंकरपुर की सिलाई यूनिट महिलाओं के लिए घर के पास रोजगार का मजबूत माध्यम बन गई है। यूनिट का संचालन कर रहीं जयमाला ने बताया कि यहां काम मिलने से महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ अपनी आय भी बढ़ा रही हैं। राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के काम ने उन्हें बाजार से सीधे जुड़ने और अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर दिया है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
महिलाओं को मिल रहा कई जगहों से नियमित काम
चांदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता के मुताबिक 15 अगस्त और 26 जनवरी के आसपास तिरंगों की मांग काफी बढ़ जाती है। सरकारी विभागों, स्कूल-कॉलेजों, ब्लॉक कार्यालयों व स्थानीय बाजार से मिलने वाले ऑर्डर से समूह की महिलाओं को नियमित काम मिल रहा है। बीते गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा निर्माण और बिक्री से महिलाओं ने करीब एक लाख रुपये की बचत भी अर्जित की थी।
फेडरेशन की 15 से 20 महिलाएं तिरंगा बनाने में जुटीं
रीप की जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि सहसपुर में स्थापित सिलाई यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की 15 से 20 महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। पहले भी महिलाएं राष्ट्रीय पर्वों के लिए तिरंगे बनाती रही हैं, लेकिन यूनिट की स्थापना के बाद बड़े स्तर पर उत्पादन संभव हुआ है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को देखते हुए विभाग और अन्य संस्थाओं की ओर से भी इन महिलाओं से तिरंगे खरीदे जा रहे हैं।
महिलाओं को उनकी दक्षता के अनुसार मिल रहा काम
सीडीओ अभिनव शाह ने कहा कि रीप और एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनकी रुचि और दक्षता के अनुरूप स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर महिलाएं विभिन्न आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय बाजार और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग भी इनसे राष्ट्रीय ध्वज खरीद रहे हैं।

राष्ट्रभक्ति के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि रीप के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी करने के साथ अपनी आय भी बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर खड़े करने के साथ राष्ट्रीय उत्सव में अपने हुनर और प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। शंकरपुर की सिलाई यूनिट इस बात की मिसाल है कि स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।






