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‘राष्ट्र प्रथम’ था अटल का मंत्र, योगी बोले- सत्ता नहीं सेवा थी उनकी राजनीति

अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में श्रद्धांजलि सभा और साहित्य संध्या, योगी ने कारगिल, आपातकाल और गठबंधन राजनीति के दौर में उनके राष्ट्रहित वाले फैसलों को किया याद

लखनऊ, 17 अगस्त 2026:

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्रवादी सोच को याद किया गया। पं. अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं साहित्य संध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ ने अटल जी को भारतीय राजनीति का ऐसा शिखर बताया जिसकी पहचान सत्ता से नहीं अपितु सेवा, समर्पण, सिद्धांत और निष्कलंक सार्वजनिक जीवन से बनी। उन्होंने कहा कि अटल जी के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ कोई नारा नहीं, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं बनने दिया। देशहित का सवाल आया तो उन्होंने दलगत हितों तक को पीछे रखने में संकोच नहीं किया। यही कारण था कि अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी अटल जी का सम्मान करते थे। उन्होंने कहा कि आज गठबंधन बनते और टूटते हैं। क्षणिक राजनीतिक स्वार्थों के लिए पूरा राजनीतिक ताना-बाना बदल जाता है लेकिन अटल जी ने बार-बार राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर राजनीति में एक अलग आदर्श स्थापित किया।

योगी ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश में पाकिस्तान के अमानवीय अत्याचार के खिलाफ देश की एकता जरूरी थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी आगे आए और बांग्लादेश मुक्ति अभियान का समर्थन किया। आपातकाल के दौर में भी उन्होंने लोकतंत्र को दलगत हितों से ऊपर रखा। भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले आंदोलन में जनसंघ की भूमिका को उन्होंने इसी राष्ट्रहित की राजनीति का उदाहरण बताया।

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मुख्यमंत्री ने 1989 के बाद के राजनीतिक दौर को याद करते हुए कहा कि देश राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार चुनाव हुए। ऐसे समय में अटल जी ने समन्वयवादी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक स्थिरता का रास्ता तैयार किया। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए भी जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने साफ कहा था कि वैश्विक मंच पर भारत के हित से जुड़ा मुद्दा होने पर वह देशहित की बात ही रखेंगे।

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कारगिल युद्ध को अटल जी की दृढ़ इच्छाशक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए योगी ने कहा कि उस समय कुछ लोग उन्हें कवि हृदय और सहज-सरल नेता मानकर यह सवाल करते थे कि क्या वह युद्ध की चुनौती का सामना कर पाएंगे लेकिन कारगिल ने दुनिया को अटल जी के नेतृत्व का दूसरा रूप दिखाया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक भारत की धरती पर एक भी दुश्मन मौजूद है तब तक वह देश नहीं छोड़ सकते। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल के दौरान पाकिस्तान पर बढ़े अंतरराष्ट्रीय दबाव और उसकी स्थिति ने भारत की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को दुनिया के सामने स्थापित किया।

योगी ने कहा कि अटल जी की विरासत केवल राजनीति तक सीमित नहीं थी। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल जी के सपने को साकार किया गया।

सीएम ने यूपी में अटल जी की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी को पांच बार सांसद चुनने वाले लखनऊ में ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के रूप में उनकी स्मृतियों को जीवंत रूप दिया गया है। लखनऊ में उनके नाम पर प्रदेश की पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है। उनकी पहली कर्मभूमि बलरामपुर में अटल जी के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। आगरा के बटेश्वर में भी उनकी प्रतिमा, संग्रहालय और स्मारक का कार्य पूरा हो चुका है।

कार्यक्रम में अटल जी के साहित्यिक व्यक्तित्व को भी याद किया गया। प्रसिद्ध कवि अशोक चक्रधर और सुप्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी स्मृतियों को जीवंत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी राजनेता होने के साथ कवि, लेखक और साहित्यकार भी थे और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

इस अवसर पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, दारा सिंह चौहान, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, दयाशंकर सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद अमरपाल मौर्य, सांसद बृजलाल, पूर्व सांसद अशोक बाजपेयी सहित अटल बिहारी वाजपेयी फाउंडेशन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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