
लखनऊ, 15 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे गोमती पुस्तक महोत्सव का तीसरा दिन बच्चों की कल्पनाशक्ति, युवाओं के आत्मचिंतन, महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और भारतीय शास्त्रीय संस्कृति के नाम रहा। चिल्ड्रन्स कॉर्नर में लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे सैकड़ों विद्यार्थियों ने कहानी, माइंडफुलनेस, कला और डिजिटल पठन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वहीं साहित्यिक संवाद में मानसिक शांति और महिलाओं की आर्थिक आजादी जैसे मुद्दों पर बेबाक चर्चा हुई। शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महोत्सव में शास्त्रीय रंग भर दिया।
जापानी पेपर थिएटर से बच्चों का हुआ परिचय
कार्यक्रमों की शुरुआत ‘कामिशिबाई स्टोरीटेलिंग सेशन’ से हुई। कहानीकार रंजीता सचदेवा ने बच्चों को जापान की अनूठी ‘पेपर थिएटर’ शैली से परिचित कराया। इसके बाद कहानीकार एवं कम्युनिकेशन कोच प्रियंका सागर ने ‘माइंडफुलनेस फॉर क्यूरियस माइंड्स’ सत्र में बच्चों को वर्तमान क्षण में सजग रहने और अपनी भावनाओं व खुशियों को समझने के लिए प्रेरित किया।
‘वेस्ट टू वंडर वर्कशॉप’ में कलाकार सुग्रीव विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में बच्चों ने अपशिष्ट सामग्री से आकर्षक कलाकृतियां बनाईं। वहीं राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (ReP) के ओरिएंटेशन में विद्यार्थियों को 23 भाषाओं में उपलब्ध 7,000 से अधिक ई-पुस्तकों वाली डिजिटल पहल की जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तरी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष उपहार सामग्री भी दी गई।
‘Monkey Mind’ को ‘Monk Mind’ बनाने का मंत्र
साहित्यिक सत्र में युवा लेखक अर्नव शुक्ला की पुस्तक ‘Living Like A Monk: A Journey to Solve the Mind’ पर विशेष संवाद हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार सूचनाओं, विचारों और चिंताओं से घिरे आज के मन को आत्मचिंतन, अनुशासन और जागरूकता के जरिए ‘Monkey Mind’ से ‘Monk Mind’ की दिशा में ले जाया जा सकता है। उन्होंने जर्नलिंग, ध्यान, मंत्र, सकारात्मक affirmation, visualisation और अच्छी संगति के महत्व पर भी बात की। उनका कहना था कि ‘Monk’ होना कोई मंजिल नहीं अपितु जीवनभर चलने वाली यात्रा है। सत्र का समन्वय डॉ. नेहा जैन ने किया।

‘अपनी लक्ष्मी खुद बनें’- महिलाओं की आर्थिक आजादी पर जोर
‘अस्मिता का आर्थिक पक्ष’ सत्र में लेखिका आरती गुप्ता ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, बचत, निवेश, संपत्ति निर्माण और आर्थिक फैसलों में बराबर भागीदारी पर विचार रखे। चर्चा में जोर दिया गया कि आर्थिक सशक्तिकरण केवल कमाई तक सीमित नहीं अपितु अपने पैसों पर खुद निर्णय लेने और अपने नाम पर संपत्ति बनाने की क्षमता भी है। विवाह, आर्थिक सुरक्षा और परिवार के आर्थिक निर्णयों में पुरुषों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। उनकी पुस्तक ‘I Am My Own Laxmi’ के संदर्भ में महिलाओं को अपनी आर्थिक पहचान और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया गया।

मियां मल्हार पर कथक ने जीता दिल
लखनऊ के बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। कलाकारों और विद्यार्थियों ने शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत और कथक की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की स्तुति से हुई। इसके बाद ऋतु-राग, भक्ति, ब्रज-संस्कृति और गजल की प्रस्तुतियां हुईं।
वर्षा ऋतु की छटा राग मियां मल्हार में ‘बिजुरी चमके’ के जरिए जीवंत हुई। इसके बाद ‘बरसन लागी रे बदरिया’ बंदिश को तीनताल और राग मियां मल्हार में कथक के जरिए प्रस्तुत किया गया। द्रुत लय की लयकारी और नृत्यात्मक अभिव्यक्ति ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।






