
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 22 सितंबर 2026ः
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अत्याचार से प्रभावित लोगों को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाने के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में सीएम ने कहा कि अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनका समय से निस्तारण किया जाए। समिति की बैठक महज औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका असर पीड़ितों को जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक लंबित विवेचनाओं के कारणों की समीक्षा कर गंभीर और लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा होगी। प्रभावी पैरवी के लिए जरूरत के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता के निर्देश दिए गए हैं।
राहत राशि में देरी पर अलग से होगी पड़ताल
सीएम ने कहा कि पात्र पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए। राहत राशि में देरी ह़ोने पर अलग से समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की मदद सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जरूरत के मुताबिक उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाए। गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बेहतर जिलों की व्यवस्थाओं को लागू करने पर जोर
मामलों की विवेचना, न्यायालय में स्थिति, राहत राशि और पीड़ितों को दी जा रही अन्य सहायता की शासन स्तर से निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन जिलों में विवेचना, निस्तारण या राहत वितरण की प्रगति अपेक्षित नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा होगी। वहीं, बेहतर काम करने वाले जिलों की व्यवस्थाओं को दूसरे जिलों में लागू करने पर भी जोर दिया गया। सीएम ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
2024 में 189 व 2025 में 157 मामले दर्ज
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 अभियोग, वर्ष 2025 में 157 अभियोग और 15 सितंबर 2026 तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं। वर्ष 2026 में दर्ज मामलों में 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। राहत के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई है। धामी ने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक एपी अशुमन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।






