RMLNLU : योगी का बड़ा बयान- 2017 से पहले यूपी में था ‘रूल ऑफ माफिया’, अब कानून का राज, युवा वकीलों को दी नसीहत
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सीएम ने आपातकाल व न्यायमूर्ति एचआर खन्ना का किया जिक्र, बोले- अन्याय के सामने चुप रहना विकल्प नहीं, 260 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 20 में से 13 पदक छात्राओं के नाम

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरएमएलएनएलयू) के पांचवें दीक्षांत समारोह में कानून के शासन, संवैधानिक मूल्यों और न्यायपालिका की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘रूल ऑफ माफिया’ था लेकिन उनकी सरकार ने प्रदेश में ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, सिद्धांतों पर अडिग रहने और निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय परिसर स्थित अंबेडकर ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान करीब 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित भी किया गया।
‘2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश पर रहता था संदेह’
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह की स्थिति रहती थी। माफिया के प्रभाव के कारण विकास बाधित होता था। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर उत्तर प्रदेश की छवि बदलने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।’ उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य के मार्ग पर चलने, अनुशासन बनाए रखने और सीखने की ललक कभी समाप्त नहीं होने देने की प्रेरणा दी।

आपातकाल और न्यायमूर्ति एचआर खन्ना का किया उल्लेख
सीएम योगी ने 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 को भी भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख बताया। उन्होंने कहा कि आपातकाल ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच का अंतर समझाया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय इतिहास में अपना स्थान बनाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी केवल अदालतों तक सीमित नहीं है। उन्हें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के साथ गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी योगदान देना चाहिए। गलत काम के लिए दबाव बनाया जाए तो सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

उन्होंने राम के कर्म और मर्यादा, कृष्ण के हृदय तथा शिव के मस्तिष्क का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को आदर्शों के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। साथ ही धारा 370 हटाने और वर्ष 2014 के बाद हुए सुधारों का उल्लेख किया।
पदक हासिल करने में छात्राओं ने मारी बाजी
इस वर्ष पदक हासिल करने में छात्राओं का दबदबा रहा। कुल 20 पदकों में से 13 छात्राओं और सात छात्रों को मिले। बीए एलएलबी (ऑनर्स) में तेजस्विनी कौशल ने स्वर्ण, ईशा अग्रवाल ने रजत और निशा वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। वहीं, एलएलएम में रूपल जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक प्रदान किया गया।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के 5वें दीक्षांत समारोह में…
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— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 17, 2026
बौद्धिक संपदा अधिकार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में भी स्वर्ण और कांस्य पदक छात्राओं के नाम रहे। समारोह में मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज तथा न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करने का संदेश दिया।






