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ISRO News : GPS के लिए अब दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम, अंतरिक्ष में पहुंचा NVS-03

Indian Navigation System : चार उपग्रहों के साथ फिर बहाल हुई NavIC की ऑपरेशनल क्षमता, 1500 किलोमीटर तक मिलेगी नेविगेशन सुविधा, स्वदेशी परमाणु घड़ी से लैस है सैटेलाइट

न्यूज डेस्क, 31 अक्टूबर 2026:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम को मजबूती देने के लिए NVS-03 सैटेलाइट का सफल लॉन्च किया है। इसे तय योजना के मुताबिक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। इस लॉन्च के साथ भारत के NavIC सिस्टम की न्यूनतम ऑपरेशनल व्यवस्था फिर से बहाल हो गई है। अब चार उपग्रह मिलकर देश को पोजीशन, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इस सफलता पर पीएम मोदी ने इसरो की टीम को बधाई दी है।

GSLV रॉकेट से हुआ सैटेलाइट का प्रक्षेपण

24 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद शुक्रवार को करीब 50 मीटर ऊंचे GSLV रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। रॉकेट में 2232 किलोग्राम वजनी NVS-03 सैटेलाइट लगाया गया था। उड़ान के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट के तीनों चरणों ने सफलतापूर्वक काम पूरा किया। इसके बाद सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया गया।

चार उपग्रहों से फिर चालू हुई पूरी व्यवस्था

ISRO चेयरमैन वी नारायणन ने लॉन्च के बाद बताया कि NVS-01 सहित तीन नेविगेशन सैटेलाइट पहले से काम कर रहे हैं। NVS-03 के जुड़ने से NavIC की न्यूनतम ऑपरेशनल क्षमता फिर बहाल हो गई है। उन्होंने इसे देश की रणनीतिक जरूरतों से जुड़ी अहम व्यवस्था बताया। उनके मुताबिक, यह सिस्टम भारत को नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं के लिए स्वतंत्र सुविधा उपलब्ध कराता है।

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क्या है भारत का NavIC सिस्टम

NavIC यानी नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन भारत का अपना सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। यह देश के सभी हिस्सों के साथ भारतीय सीमा से करीब 1500 किलोमीटर दूर तक सेवाएं उपलब्ध करा सकता है। इसके जरिए ट्रेनों, वाहनों और समुद्री जहाजों की रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सकती है। रक्षा, परिवहन और दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल होता है। सरकार की वन नेशन, वन टाइम पहल में भी इस सिस्टम की अहम भूमिका है। हाल ही में सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 अधिसूचित किए हैं।

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स्वदेशी परमाणु घड़ी से मिलेगी सटीक टाइमिंग

NVS-03 में स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक लगाई गई है। यह उपग्रह L1, L5 और S बैंड में नेविगेशन सिग्नल भेजेगा। ISRO चेयरमैन ने बताया कि उपग्रह में लगी स्वदेशी परमाणु घड़ियों में से एक को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया है। नेविगेशन सिस्टम में सटीक समय की जानकारी बेहद अहम होती है।

दो GSLV मिशनों के बीच सिर्फ 56 दिन का अंतर

इस लॉन्च के साथ ISRO ने लगातार दो GSLV मिशनों के बीच सबसे कम अंतर का रिकॉर्ड बनाया है। दोनों मिशनों के बीच सिर्फ 56 दिनों का अंतर रहा। नारायणन ने बताया कि रॉकेट के सभी सिस्टम ने तय योजना के मुताबिक काम किया। उन्होंने वैज्ञानिकों, उद्योग से जुड़े भागीदारों और शैक्षणिक संस्थानों के योगदान की भी जानकारी दी। इस मिशन के कुल बजट का करीब 80 फीसदी हिस्सा भारतीय उद्योगों को दिया गया था।

अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचेगा सैटेलाइट

फिलहाल NVS-03 को ऐसी कक्षा में स्थापित किया गया है, जहां पृथ्वी से इसकी न्यूनतम दूरी 170 किलोमीटर, जबकि अधिकतम दूरी 37,023 किलोमीटर है। अब यह अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से 32.5 डिग्री पूर्व में तय जियोसिंक्रोनस ऑर्बिटल स्लॉट तक पहुंचेगा। ISRO ने प्रोपल्शन सिस्टम की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए थे। इसके तहत सैटेलाइट के पाइरोटेक्निक वाल्व लॉन्च से पहले ही खुले रखे गए थे।

EOS-05 भी दे रहा बेहतर डेटा

ISRO चेयरमैन ने सितंबर में लॉन्च किए गए EOS-05 जियो-इमेजिंग सैटेलाइट की स्थिति की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यह उपग्रह सही तरीके से काम कर रहा है। इससे अच्छी गुणवत्ता का डेटा मिल रहा है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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