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UP News : आपदा में परिवार पर टूटा दुख तो सरकार देगी 8 लाख, किसानों के मुआवजे में भी बड़ा बदलाव

योगी सरकार पशुधन के नुकसान पर भी मदद में करेगी वृद्धि, 10 लाख से ज्यादा किसानों की फसल प्रभावित, नए नियम 2030-31 तक लागू रहेंगे

लखनऊ, 6 नवंबर 2026:

यूपी में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों, किसानों और पशुपालकों को अब पहले से ज्यादा आर्थिक मदद मिलेगी। योगी सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के तहत मिलने वाले मुआवजे के नियमों में बदलाव किया है। सबसे बड़ा बदलाव आपदा में मौत होने पर मिलने वाली सहायता राशि को लेकर किया गया है। अब मृतक के परिवार को चार लाख की जगह आठ लाख रुपये दिए जाएंगे। फसल, पशुधन, मकान सहित सार्वजनिक संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सहायता राशि बढ़ाई गई है। नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेंगे।

बड़े पशुओं की मौत पर 50 हजार रुपये

राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा में गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट की मौत होने पर अब 50 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। पहले यह रकम 40 हजार रुपये थी।

बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मौत पर मिलने वाली राशि चार हजार से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। मुर्गीपालकों को प्रति मुर्गी 100 की जगह 130 रुपये मिलेंगे। भार ढोने वाले पशुओं के नुकसान पर सहायता राशि 20 हजार से बढ़ाकर 25,400 रुपये कर दी गई है।

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किसानों को फसल नुकसान पर ज्यादा मुआवजा

प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर किसानों को मिलने वाली मदद में भी बढ़ोतरी की गई है। सिंचित जमीन पर फसल नुकसान के लिए अब 17 हजार की जगह 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। वर्षा आधारित खेती में यह सहायता 8,500 से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

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बागवानी और कृषि वानिकी से जुड़ी फसलों के नुकसान पर 22,500 की जगह 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। रेशम उत्पादन से जुड़ी फसलों के लिए सहायता छह हजार से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। गन्ने की फसल के नुकसान पर अब 7,500 की जगह 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। कृषि जमीन के कटान और भूस्खलन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी सहायता के नए मानक तय किए गए हैं।

10 लाख से ज्यादा किसानों की फसल को नुकसान

राहत आयुक्त के मुताबिक, प्रदेश में एक अप्रैल से चार नवंबर 2026 के बीच 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। नुकसान झेलने वाले किसानों को तय मानकों के आधार पर आर्थिक मदद दी जा रही है। मुआवजा वितरण में देरी न हो, इसके लिए सभी जिलाधिकारियों से एक अप्रैल से चार नवंबर तक हुए फसल नुकसान का ब्योरा मांगा गया है। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद पात्र किसानों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

मकान टूटने पर 2.06 लाख रुपये तक की मदद

आपदा में मकानों को होने वाले नुकसान के लिए भी नई दरें तय की गई हैं। मैदानी इलाकों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए 1.85 लाख रुपये मिलेंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में यह सहायता 2.06 लाख रुपये होगी। पक्के मकान को आंशिक नुकसान पहुंचने पर मैदानी क्षेत्रों में 93 हजार रुपये, जबकि पहाड़ी इलाकों में 1.03 लाख रुपये की मदद मिलेगी।

स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी तय हुई राशि

प्राकृतिक आपदा में सार्वजनिक संस्थानों को नुकसान पहुंचने पर भी सरकार आर्थिक सहायता देगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालय के लिए 15.50 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। माध्यमिक विद्यालय, छात्रावास, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और पॉलिटेक्निक संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों सहित दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं।

राहत शिविरों में 30 दिन तक मिलेगा भोजन

आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक भोजन, कपड़े, अस्थायी आवास सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 60 दिन या जरूरत के मुताबिक इससे ज्यादा भी की जा सकती है। पेयजल की आपात व्यवस्था के लिए सामान्य हालात में 30 दिन तक मदद मिलेगी। सूखे की स्थिति में यह सुविधा 90 दिनों तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि, औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाले नुकसान को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है।

बैंक खाते में सीधे पहुंचेगी सहायता राशि

सरकार ने मुआवजा वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को अनिवार्य किया है। व्यक्तिगत लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके साथ ही लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी की गई है। इससे सहायता पाने वाले लोगों की पात्रता की जानकारी उपलब्ध रहेगी।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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