रेखा आर्या प्रकरण : SIT की बड़ी कार्रवाई, गिरधारी लाल साहू व उसके भतीजे को दबोचा
चार कंपनियों से हटाने के लिए कैबिनेट मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप, दोनो को यूपी के झांसी व बरेली से गिरफ्तार किया गया, साहू के खिलाफ यूपी व उत्तराखंड के विभिन्न थानों में दर्ज हैं 44 मुकदमे

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 7 नवंबर 2026:
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े हाईप्रोफाइल प्रकरण में देहरादून पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू और उसके भतीजे सतेंद्र राठौर को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर रेखा आर्या के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनके आधार पर चार कंपनियों के निदेशक पद से उन्हें हटाने का आरोप है। शनिवार को एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में इसका खुलासा किया।
एसएसपी के अनुसार पुलिस ने मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू को यूपी के झांसी और भतीजे सतेंद्र राठौर को बरेली के जोगी नवादा से गिरफ्तार किया है। साहू के खिलाफ यूपी और उत्तराखंड के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर एक्ट समेत 44 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस को मिली है। दोनों की गिरफ्तारी प्रकरण की जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है। दोनों आरोपियों से एसआईटी पूछताछ कर रही है। पुलिस अब कंपनियों से संबंधित दस्तावेजों, कथित फर्जी हस्ताक्षरों और पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल में जुटी है।
15 अक्टूबर को कैंट कोतवाली में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह मामला 15 अक्टूबर 2026 को उस समय सुर्खियों में आया था, जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून की कैंट कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि साहू ने पहले से विवाहित होने की बात छिपाकर उनसे विवाह किया। इसके बाद उनके साथ मारपीट, गाली-गलौच, मानसिक उत्पीड़न और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया गया। उन्होंने जान से मारने की धमकी देने और हत्या की साजिश से जुड़े ऑडियो का भी हवाला दिया था।
शिकायत का एक अहम हिस्सा कंपनियों में निदेशक पद से हटाए जाने से जुड़ा था। आरोप था कि गिरधारी लाल साहू ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उनका इस्तेमाल कर उन्हें कंपनियों से बाहर कर दिया। इस प्रकरण के सामने आने के बाद मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया था। गिरधारी लाल साहू ने भी इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए मंत्री पर पलटवार किया था।
भतीजे को चार कंपनियों में निदेशक बनाने का आरोप
कैंट कोतवाली में दर्ज मुकदमे में पुलिस ने कई धाराओं में अभियोग दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने नौ सदस्यीय एसआईटी गठित की। विवेचना के दौरान एसआईटी ने संबंधित ऑडियो क्लिप कब्जे में ली और कई गवाहों के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों और गवाहों से मिली जानकारी के आधार पर जांच में सामने आया कि गिरधारी लाल साहू ने अपने भतीजे सतेंद्र राठौर के साथ मिलकर कथित रूप से रेखा आर्या के फर्जी हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों में हेराफेरी की।
पुलिस के अनुसार इन दस्तावेजों के आधार पर रेखा आर्या को चार कंपनियों से निदेशक पद से हटाकर सतेंद्र को निदेशक बनाया गया। इनमें देवों के देव महादेव, बनखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। जांच में भतीजे की भूमिका सामने आने के बाद उसका नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी ने उत्तराखंड, यूपी और अन्य राज्यों में अलग-अलग टीमें भेजी थीं। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने में जुटी थी।





