Uttar Pradesh

चित्तौरा झील बनेगी ईको-टूरिज्म का नया पावरहाउस, 4.10 करोड़ की परियोजना से बदलेगी बहराइच की तस्वीर

महाराजा सुहेलदेव की कर्मस्थली पर आधुनिक सुविधाओं का होगा विस्तार, इतिहास, प्रकृति और पर्यटन का होगा संगम

लखनऊ/बहराइच, 26 अप्रैल 2026:

यूपी में ईको-टूरिज्म को नई ऊंचाई देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बहराइच जनपद स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक के पास चित्तौरा झील को एक आधुनिक पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 4.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसमें से 50 लाख रुपये की पहली किश्त जारी भी कर दी गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना पीएम मोदी के नेतृत्व और सीएम योगी के मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि चित्तौरा झील प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है। यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे विकसित कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

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परियोजना के तहत झील क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। इसमें कैफेटेरिया ब्लॉक पर सबसे अधिक 158.83 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। डेक और बोट जेट्टी के निर्माण पर 56.41 लाख रुपये निर्धारित हैं। इसके अलावा टिकट काउंटर, शौचालय, जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल संचयन, ड्रेनेज और विद्युत व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा। पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी सिस्टम, बायो फेंसिंग, उद्यानिकी कार्य और बैठने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

इतिहास के पन्नों में दर्ज चित्तौरा झील वीरता की गाथा समेटे हुए है। 11वीं शताब्दी में यहीं महाराजा सुहेलदेव की सेना ने महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी को परास्त किया था। इसके अलावा इस स्थल का पौराणिक महत्व भी है। मान्यता है कि त्रेता युग में यह ‘टेढ़ी नदी’ के रूप में जानी जाती थी। मुनि अष्टावक्र का आश्रम इसी तट पर स्थित था।

पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में 34 लाख से अधिक पर्यटकों ने बहराइच का दौरा किया। यह इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि यह परियोजना प्रदेश में ईको-टूरिज्म को नई दिशा देगी। उन्होंने कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य और कारीकोट गांव को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि बहराइच तेजी से पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है।

नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र में थारू संस्कृति, होम-स्टे मॉडल और विस्टाडोम कोच के जरिए प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव इसे और खास बनाता है। आने वाले समय में चित्तौरा झील पर्यटन का नया केंद्र बनने के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई चमक देगी।

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