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शेयर बाजार में बिकवाली का तूफान… सेंसेक्स 800 अंक टूटा, IT शेयरों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता और कमजोर वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर दिखा, रुपये में भी कमजोरी दर्ज हुई, जबकि आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला

बिजनेस डेस्क, 3 जून 2026:

भारतीय शेयर बाजार बुधवार को तेज गिरावट के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया।

कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 142 अंक की गिरावट के साथ 74,507.73 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 करीब 68 अंक फिसलकर 23,415.95 पर पहुंच गया। कुछ ही देर में बिकवाली तेज हुई और सेंसेक्स 782 अंक टूटकर 73,867.74 पर आ गया। वहीं निफ्टी 205 अंक लुढ़ककर 23,278.50 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.85 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.58 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपया कमजोर पड़ा और डॉलर के मुकाबले 15 पैसे टूटकर 95.47 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.27 पर बंद हुआ था।

सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही। निफ्टी आईटी सूचकांक करीब 3.9 फीसदी लुढ़क गया। रियल्टी, मीडिया, वित्तीय सेवाएं, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक सेक्टर भी लाल निशान में रहे। हालांकि ऑटो और मेटल सेक्टर में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।

बाजार के बड़े शेयरों में टीसीएस सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसके शेयर करीब 6.6 फीसदी टूट गए। टेक महिंद्रा, इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में भी 3 से 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,229 का स्तर फिलहाल अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इससे नीचे जाने पर दबाव और बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, बाजार में मजबूत तेजी की वापसी के लिए निफ्टी का 23,800 के ऊपर बंद होना जरूरी माना जा रहा है।

इस बीच निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर भी टिकी है। तीन दिन तक चलने वाली यह बैठक बुधवार से शुरू हो गई है। ब्याज दरों, महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर आने वाले संकेत बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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