AIIMS Raebareli का अलर्ट : हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार, लक्षण दिखते ही पहुंचें अस्पताल
विश्व स्ट्रोक दिवस पर एम्स में जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञ ने बताया- साढ़े चार घंटे के भीतर इलाज से बच सकती है मरीज की जान और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान से बचाने में मिल सकती है मदद
विजय पटेल
रायबरेली, 28 अक्टूबर 2026:
ब्रेन स्ट्रोक के मामले में समय पर उपचार मरीज की जान बचाने और दिव्यांगता के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। भारत में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होता है जबकि हर चार मिनट में एक व्यक्ति की इससे मृत्यु हो जाती है। ऐसे में चेहरे का एक ओर झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी और बोलने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह जानकारी विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर रायबरेली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में दी गई।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिता जैन के मार्गदर्शन में न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्ट्रोक की समय पर पहचान, बचाव और त्वरित उपचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार या इंतजार में समय बर्बाद करने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।
मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित होने से होता है स्ट्रोक
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अर्चना वर्मा ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक मृत्यु और दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है। यह स्थिति मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होने या मस्तिष्क में रक्तस्राव होने पर उत्पन्न होती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
चेहरे का टेढ़ापन और बोलने में परेशानी को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के मुताबिक चेहरे का एक ओर झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या दूसरों की बात समझने में कठिनाई, अचानक दिखाई देने में परेशानी और चलते समय संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के प्रमुख संकेत हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। लक्षण शुरू होने का समय नोट करना भी डॉक्टरों को उपचार तय करने में मदद कर सकता है।
साढ़े चार घंटे में इलाज से मिल सकता है फायदा
डॉ. वर्मा ने बताया कि कुछ उपयुक्त मरीजों को लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है। मरीज की स्थिति और जांच के आधार पर अन्य आधुनिक उपचार भी उपलब्ध हैं। इसलिए अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए।
बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर रखें नियंत्रण
स्ट्रोक का खतरा कम करने के लिए विशेषज्ञों ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने, हृदय रोगों का समय पर उपचार कराने, नियमित व्यायाम करने और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी। तंबाकू से दूरी बनाने और शराब के सेवन से बचने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली और लक्षणों की समय पर पहचान स्ट्रोक से होने वाले गंभीर नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण हैं।






